कौशांबी–
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), उत्तर प्रदेश के संविदा कर्मचारियों द्वारा अपनी लंबित मांगों को लेकर लखनऊ के ईको गार्डन में चलाया जा रहा आंदोलन शासन स्तर पर सकारात्मक वार्ता एवं आश्वासनों के बाद समाप्त हो गया है। इसके बाद कौशांबी जनपद के NHM संविदा कर्मचारी भी अपने कार्यस्थलों पर वापस लौट रहे हैं।
संविदा कर्मचारियों के हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश के साथ संगठन के प्रतिनिधिमंडल की बैठकें हुईं। वार्ता में वेतन नीति, समान कार्य-समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा, चिकित्सा बीमा, स्थानांतरण नीति, सेवा अनुबंध, नियमित नियुक्तियों में वरीयता तथा आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
जिलाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि वेतन नीति और समान कार्य-समान वेतन पर समिति बनेगी
वेतन विसंगतियों को दूर करने तथा कार्य, पद और शैक्षिक योग्यता के अनुरूप वेतन निर्धारण की मांग पर शासन स्तर से समिति गठित करने का आश्वासन दिया गया है। समिति को जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। कर्मचारियों की मांग है कि वरिष्ठता और पूर्व में प्राप्त वेतन वृद्धि को भी नई वेतन व्यवस्था में शामिल किया जाए।
EPF, ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा पर कार्रवाई
कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मांगों पर EPF और ग्रेच्युटी के लिए राज्य बजट में प्रावधान किए जाने की जानकारी दी गई। चाइल्ड केयर लीव, अर्जित अवकाश और विशेष अवकाश जैसे विषयों पर HR Policy Review समिति के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई। सेवा अवधि के आधार पर लॉयल्टी बोनस के संबंध में भारत सरकार को पत्र भेजने का आश्वासन भी दिया गया।
मंडल अध्यक्ष अवनीश मिश्रा ने बताया कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा और आवास की मांग रखी गई
NHM कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के विषय में समिति के माध्यम से कार्रवाई का आश्वासन मिला है। सरकारी आवास उपलब्ध कराने के संबंध में संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजे जाने की जानकारी भी दी गई। कर्मचारी संगठनों ने इन सुविधाओं को जल्द लागू करने की मांग की है।
प्रवक्ता सिबली रजा ने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन और सेवा सुरक्षा पर चर्चा हुई
MCTS, IDSP एवं COVID-19 सहित संबंधित कार्यक्रमों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के समायोजन अथवा सेवा निगम की सुविधाएं उपलब्ध कराने के विषय पर भी चर्चा हुई। इस संबंध में शासनादेश के अनुसार आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई।
इसके अतिरिक्त प्रतिवर्ष सेवा अनुबंध कराने की व्यवस्था समाप्त करने, स्थानांतरण नीति में संशोधन, नर्स मेंटर एवं संपूर्णा क्लिनिक के सेवा मुक्त कर्मचारियों की बहाली तथा नियमित नियुक्तियों में संविदा कर्मचारियों को सेवा अवधि के आधार पर वरीयता देने जैसे विषय भी वार्ता में शामिल रहे।
30 कार्यदिवस में कार्रवाई की अपेक्षा
संगठन की ओर से शासन को मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई के लिए 30 कार्यदिवस का समय दिया गया है। संगठन का कहना है कि यदि निर्धारित अवधि में मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है, तो कर्मचारी पुनः एकजुट होकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
कौशांबी के कर्मचारियों ने काम पर लौटने का लिया निर्णय
आंदोलन के समापन के बाद कौशांबी जनपद के NHM संविदा कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए काम पर लौटने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र देकर कर्मचारियों की कार्य पर वापसी की सूचना देने तथा आंदोलन अवधि में अनुपस्थित रहने के कारण किसी कर्मचारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने का अनुरोध किया जाएगा।
कर्मचारी संगठनों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या अधिकारी के विरुद्ध नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान, अधिकार, सुरक्षित भविष्य और न्यायोचित सेवा नीति के लिए था। शासन स्तर पर हुई वार्ता को सकारात्मक पहल मानते हुए कर्मचारी अब आश्वासनों के धरातल पर उतरने की प्रतीक्षा करेंगे।
संगठन का संदेश: कर्मचारियों की एकजुटता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। आंदोलन समाप्त हुआ है, लेकिन मांगों के समाधान और संविदा कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य के लिए प्रयास जारी रहेंगे। इस दौरान जिलाध्यक्ष डॉ अरुण कुमार , मण्डल अध्यछ अवनीश मिश्रा, सिबली रजा प्रवक्ता मौजूद रहे








