कौशांबी में बौद्ध सर्किट हाइवे निर्माण के दौरान भू-अधिग्रहण में राजस्व विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने मिलकर सरकारी खजाने को 6 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई है।
अधिसूचना जारी होने के बाद धारा-80 की कार्रवाई पूरी तरह प्रतिबंधित थी, फिर भी तत्कालीन एसडीएम प्रखर उत्तम, तहसीलदार भूपाल सिंह और नायब तहसीलदार विनीता पांडेय की मिलीभगत से नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। काश्तकारों को मनमाना मुआवजा दिलाकर सरकारी धन की जमकर बंदरबांट की गई।
सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि पूरे खेल का मुख्य सूत्रधार लेखपाल कमलेश कुमार निलंबन के बाद आखिर किसकी मेहरबानी से दोबारा बहाल हो गया… क्या बड़े मगरमच्छों को बचाने के लिए सिर्फ छोटी मछलियों पर गाज गिराने का नाटक किया जा रहा है…
जिलाधिकारी डॉ. अमित पाल शर्मा की जांच में घोटाले की परतें खुलने के बाद पूर्व एसडीएम प्रखर उत्तम के खिलाफ शासन को चार्जशीट भेजी जा चुकी है। जो साहब कौशाम्बी में करोड़ों का घोटाला करके अब गोरखपुर में तैनात हैं, उन पर सख्त कार्रवाई कब होगी..
क्या सीएम योगी के ‘जीरो टॉलरेंस’ का बुलडोजर ऐसे भ्रष्ट अफसरों पर चलेगा या कागजी जांच में ही मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा…







