245 साल पुराना है कौशांबी का कुप्पी युद्ध, 2 दिनों तक लड़ती है राम और रावण की सेना

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कौशाम्बी/मो0 यासीन

245 साल पुराना है कौशांबी का कुप्पी युद्ध, 2 दिनों तक लड़ती है राम और रावण की सेना

रामलीला में दोनों दलों के बीच कुप्पी युद्ध में दो दिन में 7 बार कुप्पी युद्ध होता है. पहले दिन की चारों लड़ाई रावण सेना जीतती है. दूसरे दिन की तीन लड़ाई होती है. यह तीनों लड़ाई जीतकर राम की सेना विजयादशमी का पर्व मनाती है।

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के दारानगर में दो दिवसीय ऐतिहासिक 245वां कुप्पी युद्ध शुरू हो गया है. आज वक्त के साथ-साथ तमाम चीजें बदलीं, लेकिन नहीं बदला तो दारा नगर की रामलीला का कुप्पी युद्ध. आज भी ये युद्ध अपना स्वरूप कायम किए हुए है. 245 वर्षों से आज भी लगातार बिना रुके चल रहा है. यहां की रामलीला देखने के लिए आसपास के इलाके से बड़ी तादाद में लोग जमा होते हैं. यहां की रामलीला 244 सालों से बिना किसी बाधा के और परंपरा अनुसार होती चली आ रही है।

राम की सेना लाल रंग के कपड़ो में होती है और रावण की सेना काले कलर का कपड़ा पहनते है।

दो दिन चलने वाला कुप्पी युद्ध में पहले दिन काले कपड़ों से सजी हुई रावण सेना की जीत होती है. वहीं दूसरे दिन लाल कपड़े में युद्ध करने वाले राम की सेना की असत्य पर सत्य की जीत का विजय पर्व मनाया जाता है. कुप्पी युद्ध का नजारा देख ऐसा लगता है, जैसे वास्तव में युद्ध हो रहा हो. युद्ध में राम और रावण की सेना आमने-सामने होती है. आमना-सामना होने पर दोनों सेनाओं के बीच प्लास्टिक की कुप्पी से युद्ध होता है. जैसे ही आयोजकों की सीटी बजाती है, राम-रावण दोनों ही दल के सेनानी जिस तरह एक-दूसरे पर टूट पड़ते हैं, उसे देखकर दर्शक रोमांच से भर उठते हैं।

2 दिन में होता है 7 बार युद्ध कुप्पी युद्ध

सिराथू तहसील के दारा नगर की रामलीला में दोनों दलों के बीच कुप्पी युद्ध में 2 दिन में 7 बार युद्ध होता है. पहले दिन की चारों लड़ाई रावण सेना जीतती है. दूसरे दिन 3 लड़ाई होती है. यह तीनों लड़ाई जीतकर राम की सेना विजयादशमी का पर्व मनाती है. दोनों दिन में सभी सात युद्ध 10 मिनट के होते हैं. राम और रावण दोनों ही दल में 25-25 सेनानी होते हैं. युद्ध इतना विकराल होता है कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. युद्ध में सेनानी घायल भी हो जाते हैं, लेकिन रणभूमि की मिट्टी ही इनके लिए दवा का काम करती है. सेनानी बताते हैं कि युद्ध में शामिल होना उनके लिए गौरव की बात है।

दारा नगर में एकादशी को होता है रावण दहन

बता दें कि पूरे भारत में दशहरा के दिन ही रावण को जलाया जाता है, उसका पुतला दहन किया जाता है, लेकिन दारा नगर की इस ऐतिहासिक रामलीला में रावण का वध एकादशी को किया जाता है, क्योंकि रावण एक बहुत बड़ा विद्वान था और विद्वान होने के साथ-साथ ब्राह्मण था और ऐसा शास्त्रों में लिखा गया है. एकादशी के दिन जिसकी मृत्यु होती है, वह सीधे बैकुंठ जाता है. इसलिए दारा नगर के ऐतिहासिक रामलीला में रावण का वध एकादशी को किया जाता है. इस बार दो दिन चलने वाले कुप्पी युद्ध का आयोजन शनिवार और रविवार को किया गया है और इसे लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

 

पहले चमड़े की खाल की कुप्पी से होता था युद्ध अब प्लास्टिक की कुप्पी से होता है युद्ध

दारा नगर के ऐतिहासिक कुप्पी युद्ध में पहले प्लास्टिक की कुप्पी की जगह खाल की कुप्पी बनाई जाती थी, लेकिन जैसे-जैसे वक्त बदला वैसे-वैसे कुप्पी युद्ध का स्वरूप बदला. अब प्लास्टिक की कुप्पी का इस्तेमाल किया जाता है. प्लास्टिक की कुप्पी के इस्तेमाल से अब राम और रावण सेना के बीच जो युद्ध होता है उसमें कोई घायल नही होता।

Up Head Line
Author: Up Head Line

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