कौशाम्बी
*हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी दशहरे मेले का बड़े ही धूमधाम से किया गया आयोजन*
*कौशांबी* सिराथू तहसील के अंतर्गत शहजादपुर में हर साल की भांति इस साल भी बड़े ही धूमधाम से दशहरे मेले का आयोजन किया गया। राम सेना और शहजादपुर बाजार में मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच में पहला युद्ध हुआ। फिर श्री राम जी की चौकी निकाल करके मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच में दूसरा युद्ध रणधीर इंटर कॉलेज के पास होता है और तीसरा युद्ध मेघनाथ और लक्ष्मण के बीच रावण मैदान में गेंदा युद्ध होता है। मेघनाथ द्वारा लक्ष्मण को मूर्छा आ जाती है। फिर चौथा गेंदा युद्ध में लक्ष्मण द्वारा मेघनाथ को तीरों से मारा जाता है।और मेघनाथ की मृत्यु हो जाती है। पांचवा युद्ध सूर्यास्त होते ही राम और रावण के बीच होता है। इस युद्ध में रावण का वध हो जाता है। रावण के मरते ही शहजादपुर में जय श्री राम के नारे की गूंज पूरे मेले में सुनाई देने लगती है। उसके बाद शहजाद पुर के सभी लोग आपस में गले मिलकर के एक दूसरे को माला पहना करके मिठाई खिलाते हैं और भाईचारे का संदेश देते हैं और कहते हैं कि सत्य और असत्य की लड़ाई में सत्य की जीत हुई और असत्य की हार हो गई। शहजादपुर के आसपास के सभी गांव के लोग इस दशहरे मेले को देखने के लिए बड़ी ही उत्साह के साथ पहुंचते हैं।

मेले में बहुत ही भीड भाड़ का माहौल रहता है इसी को मध्य नजर रखते हुए शहजादपुर चौकी की पुलिस कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम रखती है। शहजादपुर में पत्थर के बने हुए रावण पर तीरों की बरसात की जाती है इस रावण की खूबसूरती का यह आलम है की कई जिलों में ऐसे पत्थर के खूबसूरत रावण की मूरत नहीं बनी हुई है दूर-दूर से लोग इस पत्थर के रावण को देखने के लिए आते हैं और बड़ी प्रसनसना करते हैं वीडियो और फोटो भी बनाकर ले जाते हैं।







