*कौशाम्बी– पइसा थाना क्षेत्र में सड़क किनारे खड़े हरे-भरे नीम के पेड़ों पर लकड़ी माफिया ने बेखौफ होकर आरी चला दी। एक हरा नीम का पेड़ काट दिया गया, जबकि दूसरे नीम के पेड़ को भी काटा जा रहा था। दूसरा पेड़ दिनेश पांडेय और श्रीकांत सरोज के खेतों की मेड़ के बीच स्थित था। पेड़ कटता देख श्रीकांत सरोज ने विरोध करते हुए दावा किया कि पेड़ उनकी भूमि पर स्थित है और इसकी सूचना वन विभाग को दी। शिकायत की जानकारी मिलते ही लकड़ी माफिया आधा कटा हुआ पेड़ मौके पर छोड़कर फरार हो गया।
बताया जा रहा है कि दोनों पेड़ मृतक अंसार अहमद की पत्नी द्वारा एक ठेकेदार को बेचे गए थे। हालांकि दूसरे पेड़ के स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते विरोध नहीं किया जाता तो दूसरा हरा-भरा नीम का पेड़ भी पूरी तरह काट दिया जाता।घटना के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि दिनदहाड़े हरे पेड़ों की कटाई होती रही, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत मिलने के बाद वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है।

*कौशाम्बी* जांच के लिए मौके पर भेजी गई वन विभाग की टीमक्षेत्राधिकारी वन निखलेश चौरसिया ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम को मौके पर भेज दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध वन संरक्षण से संबंधित नियमों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
*पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए वरदान है नीम*
*कौशाम्बी* नीम का पेड़ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वायु को शुद्ध करने, अधिक ऑक्सीजन उपलब्ध कराने और वातावरण को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयुर्वेद में नीम की पत्तियां, छाल, फल और टहनियों का उपयोग अनेक औषधियों के निर्माण में किया जाता है। कृषि विशेषज्ञ भी नीम को प्राकृतिक कीटनाशक और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने वाला वृक्ष मानते हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि हरे-भरे नीम के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के पर्यावरण के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है।






