गुरु ग्रह के चंद्रमा यूरोपा का धीमी गति से हुआ था विकास!

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सौरमंडल में ही पृथ्वी के बाहर जीवन के किसी ना किसी रूप में होने की काफी उम्मीदें हैं. शनि और गुरु ग्रह के चंद्रमाओं के साथ ऐसा बहुत देखने को मिलता रहता है जिससे वहां से मिल रहे संकेत काफी उम्मीदें जगाते हैं. गुरु ग्रह का चंद्रम यूरोपा इन उम्मीदवारों में शीर्ष के पिंडों में से माना जाता है. वहां के अध्ययन के लिए नासा ने एक यान भी भेज दिया है. उसकी बर्फीली सतह के नीचे स्थित महासागरों में जीवन का किसी तरह का स्वरूप होने की बहुत संभवना है. नए अध्ययन में यूरोपा के आंतरिक संरचना के विकास के बारे में बताया है कि उसके विकास की गति बहुत धीमी रही होगी.

पृथ्वी और यूरोपा की आंतरिक संरचना
यूरोपा उपग्रह के आंतरिक हिस्सा चार परतों से बने हैं. पहले सबसे ऊपरी बर्फीला खोल है. इसके नीचे नमकीन महासागर हैं जिसके नीचे पथरीला मेंटल और फिर सबसे अंदर धातु से निर्मित क्रोड़ है. बहुत से विशेषज्ञों की दलील है कि यूरोपा की आंतरिक संरचना पृथ्वी की तरह है और उसमें भी क्रोड़ और मेंटल है.

कब आया होगा अंतर
कई अध्ययनों में माना गया है कि  यूरोपा में पृथ्वी की संरचना में अंतर, जब उसका निर्माण हो रहा था या फिर उसी समय के फौरन बाद ही आया होगा. लेकिन यूरोपा बहुत ही ठंडे हालात में बना था जिसका मतलब यही है कि वह निर्मित होने के बाद पानी-बर्फ और या हाइड्रेटेड सिलिकेट से बना होगा.

खूब पानी निकला होगा
इस अध्ययन मे एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने वहां के स्नातक छात्र केल्विन ट्रिन के बनाए गए कम्प्यूटर कोड की मदद से यूरोपा के कम तापमान पर निर्माण के प्रभावों की पड़ताल की. शोधकर्ताओं ने दर्शाया  कि यदि यूरोपा का निर्माण हाइड्रोजन और ऑक्सीजन वाली हाइड्रेटेड चट्टानों से हुआ था तो उपग्रह का काफी आंतरिक हिस्स गर्म हो गया होगा जिसके कारण इससे पानी सीधे बाहर निकल गया होगा जिससे महासागर और बर्फीली खोल बन गई होगी.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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