Father Day 2023: फादर्स डे पर पढ़ें जावेद अख्तर की बेहतरीन नज्म- ‘दोराहा’

Father Day Poetry and Quotes: पिता किसी भी बेटे-बेटी के लिए जीवन का वह मजबूत पिलर होता है, जिसके सहारे वे जीवन के बड़े से बड़े संकट को बिना किसी परेशानी को पार कर लेते हैं. पिता के साये में हम खुद को आजाद, सम्पन्न और सुरक्षित महसूस करते हैं. पिता अपने बच्चों को सपनों को पूरा करने के लिए खुद को स्वाह कर देता है.

साहित्य की दुनिया में तमाम लेखकों ने अपने-अपने तरीके से पिता के व्यक्तित्व और महत्व को व्यक्त किया है. प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने अपनी नज्मों के माध्यम से पिता के महत्व को कुछ इस तरह व्यक्त किया है-

दोराहा

ये जीवन इक राह नहीं
इक दोराहा है

पहला रस्ता
बहुत सहल है
इस में कोई मोड़ नहीं है
ये रस्ता
इस दुनिया से बेजोड़ नहीं है
इस रस्ते पर मिलते हैं
रेतों के आंगन
इस रस्ते पर मिलते हैं
रिश्तों के बंधन
इस रस्ते पर चलने वाले
कहने को सब सुख पाते हैं
लेकिन

टुकड़े टुकड़े हो कर
सब रिश्तों में बट जाते हैं
अपने पल्ले कुछ नहीं बचता
बचती है
बे-नाम सी उलझन
बचता है
सांसों का ईंधन
जिस में उन की अपनी हर पहचान
और उन के सारे सपने
जल बुझते हैं

इस रस्ते पर चलने वाले
ख़ुद को खो कर जग पाते हैं
ऊपर ऊपर तो जीते हैं
अंदर अंदर मर जाते हैं

दूसरा रस्ता
बहुत कठिन है
इस रस्ते में
कोई किसी के साथ नहीं है
कोई सहारा देने वाला नहीं है
इस रस्ते में
धूप है
कोई छांव नहीं है
जहाँ तसल्ली भीक में दे दे कोई किसी को
इस रस्ते में
ऐसा कोई गांव नहीं है

ये उन लोगों का रस्ता है
जो ख़ुद अपने तक जाते हैं
अपने आप को जो पाते हैं
तुम इस रस्ते पर ही चलना
मुझे पता है
ये रस्ता आसान नहीं है
लेकिन मुझ को ये ग़म भी है
तुम को अब तक
क्यूं अपनी पहचान नहीं है

पुस्तकः तरकश
लेखकः जावेद अख्तर
प्रकाशकः स्टार पब्लिकेशन

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Author: Jagran Times

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