14 साल की लड़की ने कोर्ट में दायर की याच‍िका, गर्भपात से इनकार, आरोपी से करना चाहती है शादी

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हाइलाइट्स

याचिकाकर्ता ने लगाई थी मेडिकल बोर्ड का गठन करवाने की गुहार
वकील ने अदालत से इस मामले में आरोपी को तलब करने का आग्रह भी किया
अदालत ने कहा- आरोपी को बुलाकर याचिका का दायरा बढ़ाने की इच्छुक नहीं

नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने निर्देश दिया है कि 14 वर्षीय गर्भवती (Pregnancy) लड़की को आवश्यक देखभाल के लिए दिल्ली के बाल गृह में स्थानांतरित कर दिया जाए. नाबालिग के साथ-साथ उसके अभिभावकों ने भी गर्भपात के लिए सहमति देने से इनकार कर दिया है.

न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि याचिकाकर्ता लड़की, जो 27 सप्ताह की गर्भवती है वो गर्भावस्था को पूर्ण अवधि तक ले जाना चाहती थी और उसके अभिभावक भाई ने भी इस पर अपनी सहमत‍ि जताई है. इस गर्भावस्था (Pregnancy) को POCSO अधिनियम के तहत आपराधिक कार्रवाई का सामना कर रहे एक व्यक्ति का लड़की के साथ शारीरिक संबंधों (Physical Relations) का परिणाम  बताया गया था.

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याचिकाकर्ता ने पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और अस्पताल को निर्देश देने की मांग की थी क‍ि वह उसकी गर्भावस्था की चिकित्सा समाप्ति (Medical Termination) की संभावना का मूल्यांकन करने के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन करवाए. लेकिन बाद में उसने अपना विचार बदल दिया और कहा कि वह आरोपी से शादी करना चाहती है.

अदालत ने इस महीने की शुरुआत में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए वर्तमान याचिका को निम्नलिखित निर्देश के साथ निस्तारित करते हुए एक आदेश पारित क‍िया है: याचिकाकर्ता को किशोर न्याय (देखभाल और बच्चों का संरक्षण) अधिनियम 2015, के मानदंडों और प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक देखभाल और संरक्षण के ल‍िए लड़कियों के बाल गृह में तत्काल स्थानांतरित किया जाना चाहिए…

कोर्ट ने र‍िकॉर्ड किया है क‍ि गर्भावस्था के चिकित्सकीय समापन के संबंध में कानून की स्पष्ट स्थिति यह है कि इसके लिए केवल ‘महिला’ की सहमति की आवश्यकता होती है. लेक‍िन वर्तमान मामले में गर्भवती नाबालिग है, इसलिए कानूनन ‘अभिभावक’ से इस मामले में सहमति लेना आवश्‍यक है.

यह भी दर्ज किया गया कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता ने अपनी गर्भावस्था को अवधि तक जारी रखने और बाद में गोद लेने के लिए बच्चे को छोड़ने की इच्छा व्यक्त की है. बाल कल्याण समिति ने बच्‍चे की सुरक्ष‍ित ड‍िलीवरी और उच‍ित सहायता के ल‍िए बाल गृह में रखने का सुझाव दिया है.

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से इस मामले में आरोपी को तलब करने का आग्रह भी किया ताकि उसकी इच्छाओं का पता लगाया जा सके क्योंकि याचिकाकर्ता ने उससे शादी करने की इच्छा व्यक्त की है. हालांकि अदालत ने कहा कि वह आरोपी को बुलाकर याचिका का दायरा बढ़ाने के लिए इच्छुक नहीं है. क्योंकि यहां याचिका याचिकाकर्ता की गर्भावस्था के चिकित्सकीय समापन तक सीमित थी.

Tags: DELHI HIGH COURT, Delhi news

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Author: Up Head Line

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