
नकुल जसूजा/सिरसा: कहते हैं कि जिन्दगी में कुछ भी नामुमकिन नहीं होता, बस करने की लगन होनी चाहिए. ऐसा ही उदाहरण सिरसा के शंकर ने पेश किया है. 4 दशकों से कैनवस पेंटिंग कर रहे शंकर आज 67 साल के हो चुके हैं. उम्र ढल रही है, लेकिन उनके हौसलों में कमी नहीं है.
खास बात है कि वह पैर और मुंह से भी पेंटिंग बना लेते हैं. देश ही नहीं विदेशों में भी सिरसा के शंकर की पेंटिंग मशहूर है. उन्होंने एक बड़ी पहचान हासिल की है. हालांकि, अब उम्र ज्यादा होने के चलते शंकर शर्मा के बेटे उनकी चित्रशाला को चला रहे हैं. अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं.
पूरा परिवार चित्रकार
शंकर शर्मा का कहना है कि उनके लिए गर्व की बात है कि पूरे परिवार ने इस कला को अपना हुनर बना लिया है. साथ ही आजीविका चला रहे हैं. उनके पोते भी चित्रकारी में दिलचस्पी रखते हैं. बताया कि चित्रकारी ऐसी चीज है, जब कोई शख्स तनाव या अकेलापन महसूस करता है तो वह चित्रकारी के जरिए सब कुछ भूल जाता है. उनके द्वारा सिखाए गए छात्र चित्रकारी में देश भर में नाम कमा रहे हैं.
दीवारों पर पेंटिंग का ‘जादू’
शंकर शर्मा की पेंटिंग से सजी दीवारें भी कुछ न कुछ बयां करती हैं. उन्होंने अब तक हज़ारों पेंटिंग, ऑयल पेंटिंग, वॉल पेंटिंग, क्ले पेंटिंग, वूडन पेंटिंग की हैं. शंकर को पेंटिंग का बचपन से ही शौक था. 20 साल की उम्र में ही उन्होंने पेंटिंग बनानी शुरू कर दी थी. अब तक वह 100 से ज्यादा राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर अवार्ड जीत चुके हैं.
पेंटिंग का भी हो टैलेंट शो
शंकर के बेटे गिरिजा शंकर की पेंटिंग की कलाकृतियों का अपने देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी काफी नाम है. गिरजा शंकर ने बताया कि शुरू से ही उनको भी कला का शौक था, जिसके चलते अब वह लंबे समय से चित्रकारी कर रहे हैं. बताया कि आज के दौर में कला सिमटती जा रही है. ऐसे वक्त में वह भी कला को जीवित रखे हुए हैं. गिरजा शंकर की मांग है कि जिस तरह से म्यूजिक और डांस का टैलेंट शो अलग-अलग प्लेटफार्म पर चलता है, उसी की तर्ज पर कला से जुड़े शो को भी शुरू होने चाहिए.
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FIRST PUBLISHED : June 05, 2023, 16:25 IST








