सुशासन के लिए 15 सूत्र बताती है अश्विनी की ‘डिकोडिंग इंडियन बाबूडोम’

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अश्विनी श्रीवास्तव पेशे से पत्रकार हैं और भारतीय राजनीति तथा प्रशासन पर गहरी पकड़ रखते हैं. नौकरशाही व्यवस्था को लंबे समय से कवर करते आए हैं. अंग्रेजी में साहित्य सृजन करते हैं. हाल ही में उनकी पुस्तक ‘डिकोडिंग इंडियन बाबूडोम’ (Decoding Indian Babudom) प्रकाशित हुई है. यह पुस्तक प्रशासनिक व्यवस्था और शासन के कामकाज पर प्रकाश डालती है. पुस्तक में अश्विनी श्रीवास्तव ने अच्छे और प्रभावी शासन के लिए ’15 सूत्र’ की सिफारिश की है. लेखक का दावा है कि इन सूत्रों से प्रशासन में समाज के हर वर्ग का विश्वास और निवेश बढ़ेगा.

यह पुस्तक भारतीय अफसरशाही के बारे में लोगों के दिमाग में एक मजबूत अवधारणा कि ‘यह स्वभाव से भ्रष्ट है, दंभपूर्ण और टालमटोल करने वाली है’ को निर्दिष्ट करती है. इससे जुड़े संभावित विकारों को संक्रामक बताते हुए उन्हें ‘मिशन-मोड’ में संबोधित करने की आवश्यकता बतलाती है.

भोपाल के रहने वाले अश्विनी श्रीवास्तव कहते हैं, “देश की अफ़सरशाही से जुड़े काफ़ी मिथक हैं क्योंकि भारत जैसे विशाल देश में शासन को विभिन्न कारणों से एक बाहरी व्यक्ति आसानी से नहीं समझ सकता है। पुस्तक नौकरशाही से जुड़ी सामान्य भ्रांतियों को उजागर करने की कोशिश करती है और सरकारी कामकाज में सुधार के तरीके सुझाती है, जिससे सुशासन की प्राप्ति की जा सके.”

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वह इस पुस्तक में संपत्ति रजिस्ट्री कार्यालयों, क्षेत्रिय परिवहन कार्यालय (आरटीओ), नागरिक प्राधिकरणों में कथित संगठित भ्रष्टाचार, लालफीताशाही और बड़ी संख्या में लोक सेवकों की लोगों के प्रति गैर-पेशेवर दृष्टिकोण के संभावित कारणों को इंगित करते हैं.

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नौकरशाहों में लोगों के विश्वास की कमी, उनके असहयोग और अक्षमता की लोगों की चिरस्थायी गाथा का संकेत देते हुए, लेखक ने नवाचार, पेशेवर रवैये, लालफीताशाही, काम की प्राथमिकता और परिणाम की नहीं एवं वातानुकूलित शासन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को पुस्तक में सूचीबद्ध किया है. वे लालफीताशाही को समाप्त करने के लिए उपयुक्त समाधान भी बतलाते हैं. वह आम आदमी के नजरिए से देश की प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी भर्ती एजेंसियों और लोकपाल जैसे भ्रष्टाचार विरोधी प्रहरी की प्रभावशीलता को भी अपनी पुस्तक के माध्यम से तौलते हैं.

श्रीवास्तव अपनी पुस्तक में कहते हैं, “लालफीताशाही और भ्रष्टाचार आपस में जुड़े हुए हैं और नागरिकों और व्यापारियों के लिए काफी निराशाजनक हैं. लालफीताशाही वास्तविक है और यह किसी न किसी रूप में सभी सरकारी विभागों में मौजूद है.”

विगत 15 वर्षों से अधिक समय से नौकरशाही और शासन से संबंधित मामलों पर लिखने वाले लेखक ने इस पुस्तक में सिविल मंत्रालयों/विभागों में सशस्त्र बलों के कर्मियों की प्रतिनियुक्ति, निचले और मध्यम स्तर के कर्मचारियों के प्रशिक्षण और शासन में इनोवेशन को प्रोत्साहित करना, जैसे 15 सूत्र की सिफारिश अपनी पुस्तक में की है जिससे सुशासन लाया जा सकता है.

लेखक कहते हैं कि सुशासन सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए. लोगों की जरूरतों का मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन समय-समय पर किया जाना चाहिए ताकि सेवाओं की त्वरित डिलीवरी और लोगों की आकांक्षाओं से मेल खाने वाली व्यवस्था देश में सुनिश्चित की जा सके. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विश्व स्तर के शासन का अनुभव करने का पूरा अधिकार है. यह कुछ ऐसा है जो हमारे अफसरशाह देने में सक्षम हैं, लेखक एक आशावादी नोट पर अपने निष्कर्ष में कहते हैं.

Tags: Books, Literature

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Author: Up Head Line

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