नेपाल के नागरिकता कानून में संशोधन, चीन होगा नाराज, जानें पूरा मामला

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काठमांडू. नेपाल (Nepal) में नागरिकता कानून (Citizenship law) में एक विवादास्‍पद संशोधन को राष्‍ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने मंजूरी दे दी है. यह मंजूरी उस समय दी गई जब नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍पकमल दहल ‘प्रचंड’ अपने पहले विदेश यात्रा के दौरे पर भारत में हैं. इस कानून संशोधन को लेकर लंबे समय से बहस छिड़ी हुई थी. इससे पहले पूर्व राष्‍ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने संसद द्वारा दूसरी बार भेजे जाने के बावजूद मंजूरी नहीं दी थी. इस संशोधन का नेपाल की राजनीति पर सीधा असर होगा. ऐसा माना जा रहा है कि इस मंजूरी को लेकर चीन नाराज हो सकता है.

नेपाल के राजनेताओं का कहना है कि इस संशोधन के बाद नेपालियों से शादी करने वाली विदेशी महिलाओं को नेपाल की नागरिकता तुरंत मिलेगी और वे राजनीतिक अधिकार भी पा जाएंगी. यह कानून संशोधन चीन को मंजूर नहीं था. वह पहले भी चेतावनी देता रहा है. चीन का कहना था कि इससे तिब्‍बती शरणार्थियों को नेपाली नागरिकता और संपत्ति का अधिकार दे सकता है. ऐसे में तिब्‍बती लोग भी नेपाल के नागरिक बन जाएंगे. दरअसल नेपाल ही भारत के बाद तिब्‍बतियों का दूसरा घर माना जाता है.

चीन के हिस्‍से के रूप में तिब्‍बत को दी है मान्‍यता
चीन और नेपाल के बीच 1955 में राजनयिक संबंध स्‍थापित हुए थे और एक साल बाद दोनों देशों ने एक संधि पर हस्‍ताक्षर किए थे जिसमें नेपाल ने तिब्‍बत को चीन के हिस्‍से के रूप में मान्‍यता दी थी. चीन के कारण ही यह कानून संशोधन लगातार टल रहा था.

Tags: China and nepal, Citizenship Amendment Act, Nepali citizens, Tibet People

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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