ग्वालियर के इस संग्रहालय में आए…तो मोबाइल बनेगा गाइड, ऐसे मिलेगी धरोहरों की पूरी जानकारी

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विजय राठौड़/ग्वालियर: यदि आप ऐतिहासिक धरोहरों के विषय में रुचि रखते हैं और आप इनकी जानकारी एकत्र करना चाहते हैं, तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं. अब गुजरी महल संग्रहालय में रखी हुई धरोहर पर जल्दी ही क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, जिसकी शुरुआत सरलतम रूप से हो चुकी है. यहां आप क्यूआर कोड स्कैन कर उस धरोहर के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

निलेश लोखंडे ने बताया कि ग्वालियर का गुजरी महल संग्रहालय बेहद प्राचीन है, जिसकी स्थापना पूर्ण रूप से 1922 में की गई थी. यह आमजन के लिए खोला गया था. यहां विभिन्न स्थानों से प्राप्त हुई ऐतिहासिक धरोहर हैं, जो खुदाई में प्राप्त हुई हैं. लेकिन कई बार यहां आने वाले पर्यटक कुछ धरोहरों की जानकारी किसी माध्यम से लेने में हिचकिचाते हैं और जानकारी प्राप्त नहीं कर पाते.

अब उनके लिए पुरातत्व विभाग द्वारा एक खास सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके लिए संग्रहालय की तमाम धरोहरों पर जल्दी ही QR कोड लगाए जाएंगे. यह कोड आप अपने मोबाइल से स्कैन कर उक्त धरोहर के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. इतना ही नहीं, इसके लिए कोई अलग से चार्ज देने की आवश्यकता भी नहीं होगी. केवल आपको एक ऐप डाउनलोड करना होगा.

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मध्य प्रदेश

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मानसिंह और मृगनयनी के प्रेम की निशानी है गुजरी महल
दुर्ग की तलहटी में बना एक महल बेहद खास है, जिसमें वर्तमान में गुजरी महल संग्रहालय को संचालित किया जा रहा है. इसका संरक्षण मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग द्वारा किया जाता है. इस महल की कहानी बेहद रोचक है. बताया जाता है कि राजा मानसिंह जब एक बार शिकार पर निकले थे तो उन्होंने इस दौरान एक युवती को दो सांड़ों को झगड़ते से अलग करते देखा. उसी समय राजा उसकी वीरता के कायल हो गए. राजा मानसिंह मृगनयनी की सुंदरता पर मोहित हो गए. उन्होंने मृगनयनी के लिए विवाह का प्रस्ताव भिजवा दिया. लेकिन उसने रिश्ते ठुकरा दिया. जब राजा ने इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि आप से विवाह करने के लिए मेरी तीन शर्ते हैं.

इसलिए बना गुजरी महल
मृगनयनी ने कहा कि मेरी पहली शर्त है कि मुझे महलों में रहने की आदत नहीं है, मैं झोपड़ी में रहना पसंद करती हूं और यही मेरी वीरता और ताकत का कारण है.  राजा ने तत्काल कहा कि आपको उसी तरह के महल में रखा जाएगा, इसलिए गुजरी महल की संरचना भी एक झोपड़ीनुमा आकार में की गई है. बावजूद इसके यह महल किसी आलीशान महल से कम नहीं है.

30 KM लंबी पाइपलाइन के आज भी साक्ष्य
दूसरी शर्त थी कि मेरा सौंदर्य और मेरा व्यक्तित्व मेरे गांव के पास बहने वाली नदी के पानी की देन है. मुझे इसका पानी अगर आप मेरे महल में उपलब्ध कराएंगे, तभी मैं आपसे विवाह करूंगी. राजा ने तत्काल तकरीबन 30 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछवाई, जिसमें बिना किसी मोटर व बिजली के गुजरी महल के भीतर पानी आता था. जिसके साक्ष्य आज भी प्रमाण स्वरूप गुजरी महल में मौजूद हैं.

राजा के साथ जाती थी मृगनयनी
तीसरी शर्त कि जब भी आप युद्ध में अथवा कहीं और जाएंगे तो मैं आपके साथ रहूंगी. राजा ने मृगनयनी कि इस शर्त को भी मान लिया और रानी को विवाह के लिए तैयार कर लिया. तत्पश्चात विवाह के बाद जैसा कि रानी की शर्तें थी, उसी अनुरूप अपने महल में आई और इस महल का नाम भी गुजरी महल रखा गया. आज भी इसको गुजरी महल के नाम से ही जाना जाता है.

यहीं पर मौजूद है इंडियन मोनालिसा की प्रतिमा
मोनालिसा की प्रतिमा के तो सभी दीवाने हैं. लेकिन, ग्वालियर में इस संग्रहालय के भीतर विशेष सुरक्षा में एक प्रतिमा रखी हुई है, जिसे इंडियन मोनालिसा कहते हैं. यह प्रतिमा शाल भंजिका की है, जो की दसवीं शताब्दी की बताई जाती है. यह प्रतिमा लाल बलुआ पत्थर पर बनी हुई है. लेकिन इसकी सुंदरता और इसकी मुस्कान इतनी प्यारी है कि इसे देखते ही मानो देखते ही रहने का मन कर जाता है.

Tags: Gwalior news, History, Life18, Mp news

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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