सागर में बागेश्वर धाम पं. धीरेंद्र शास्त्री हनुमान चालीसा की एक ही चौपाई पर 3 दिन सुनाएंगे कथा

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अनुज गौतम/सागर. कहते हैं हनुमान चालीसा की एक-एक चौपाई मंत्र है. एक चौपाई की सही तरह से व्याख्या की जाए तो कई दिन तक बोला जा सकता है. ऐसे ही मध्य प्रदेश के सागर के जैसीनगर में बागेश्वर धाम पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री तीन दिन तक हनुमान चालीसा की केवल एक चौपाई पर हनुमंत कथा सुनाएंगे.

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शनिवार को पहले दिन चौपाई, ‘अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, असवर दीन जानकी माता’ का वर्णन किया. अब भक्तों को इस पर वो तीन दिन तक हनुमंत कथा का रसपान कराएंगे. पहले दिन की व्याख्या में उन्होंने बताया कि हनुमान जी महाराज आठ सिद्धियों और नौ निधियों के दाता हैं. हनुमान जी की आठ सिद्धियां- अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, सिद्धि ईशत्व और सिद्धि वशत्व है. हर सिद्धि का अलग-अलग महत्व है.

हनुमंत कथा के पहले दिन उन्होंने अणिमा और महिमा पर प्रवचन दिया. हिरण्य कश्यप और सुरसा की कथा सुनाई. उन्होंने आगे बताया कि आठ प्रकार की सिद्धियों के प्रयोग के कारण ही हनुमान जी ने भगवान राम के काज को संभाला था. सिद्धियों की उपयोगिता बड़ी महत्वपूर्ण है. सिद्धि प्राप्त कर के यदि आपने उनका सदुपयोग किया तो चारों युगों में हनुमान जी की तरह पूजे जाओगे. इससे यह भी सीख सकते हैं कि भगवान की कृपा से मनुष्य को संसार की समस्त प्रकार की वस्तुएं मिलती हैं. यदि हम उनका सदुपयोग करेंगे तो हम भी हनुमान जी की तरह पूछे जाएंगे, और यदि दुरुपयोग करेंगे तो सिद्धि को खो देंगे और बिन मौत के मारे जाएंगे.

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमान जी की शक्तियों पर उद्गार व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि धन्य हैं वीर बजरंगबली. वो कहते हैं हमें भगवान श्रीराम के काज के अलावा विश्राम ही नहीं, और हमलोगों को विश्राम के अलावा कोई काम नहीं. उन्होंने आगे कहा, हनुमान जी के चरित्र से हमें एक-एक अंग की सदुपयोगिता सीखनी चाहिए. हम जैसीनगरवासियों से भी कहेंगे कि आपको भी यही सीखना चाहिए कि जिंदगी के एक-एक पल का सदुपयोग भगवान की कथा, साधु सेवा और परोपकार के लिए करना चाहिए चरित्र ही धर्म है.

बागेश्वर धाम ने कहा कि जिसका चरित्र सुंदर होता है, उसका जीवन सुंदर होता है. हमें तो ऐसा लग रहा है कि जैसीनगर में स्वयं सीताराम जी ही हनुमान जी की कथा को सुनने के लिए बैठे हैं. पहले दिन हनुमंत कथा को सुनने के लिए यहां लाखों लोग पहुंचे थे. उनके स्वागत के लिए रात से ही भंडारे की तैयारी शुरू हो गई थी. सुबह होते-होते प्रसादी तैयार हो गई. जैसीनगर के घर-घर से महिलाएं और पुरुष सेवा देने पहुंचे हैं.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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