
इंदौर. हाल ही में रिलीज हुई फिल्म द केरला स्टोरी देश भर में चर्चा का विषय बनी हुई है. फिल्म को लेकर सियासत जारी है. पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में फिल्म पर बैन लगाया जा चुका है तो वहीं दूसरी तरफ मध्यप्रदेश जैसे राज्यों ने फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया है. फिल्म के लेखक सूर्यपाल सिंह ने बातचीत में बताया कि कुछ लोग फिल्म को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन जिन्होंने फिल्म देखी वह किसी धर्म विशेष को टारगेट करने की बात नहीं कर रहे हैं.
फिल्म द केरला स्टोरी के लेखक सूर्यपाल सिंह ने दावा किया है कि जिन लोगों ने फिल्म नहीं देखी वही लोग 32 हजार लड़कियों के धर्मांतरण का मुद्दा उठा रहे हैं. जबकि फिल्म में एक्ट्रेस अदा शर्मा साफ कह रही हैं कि मैं फातिमा बन चुकी हूं. अभी मैं सीरिया में हूं और यहां मेरी जैसी 32 हजार लड़कियां दफन हो चुकी हैं. वो यह नहीं कह रही कि भारत से यह 32 हजार लड़कियां लाई गई हैं. बल्कि वह पूरी दुनिया से सीरिया लाई गई हैं. वे सिर्फ आंकड़ों की बात कह रही हैं.
लेखक: संस्कृति से जुड़े रहने की सीख देती है फिल्म
लेखक सूर्यपाल सिंह आगे कहते हैं कि पहले इस फिल्म को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई, लेकिन जो लोग फिल्म देख कर निकल रहे हैं. वह ना तो धर्म की बात कर रहे हैं ना किसी धर्म विशेष को टारगेट करने की बात कर रहे हैं. यही कह रहे हैं कि हमें अपने संस्कारों और संस्कृति से जुड़े रहना चाहिए. यह फिल्म संयुक्त परिवार में संस्कारों से जुड़े रहने की सीख देती है. यदि हम हमारी संस्कृति और संस्कारों से जुड़े रहेंगे, तो कोई भी कट्टरवादी ताकत हमारे बच्चों को बरगला नहीं पाएगी.
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लव जिहाद शब्द बीजेपी का नहीं बल्कि एक पादरी ने किया ईजाद
बीजेपी के फिल्म की फंडिंग के आरोपों पर सूर्यपाल ने कहा यदि बीजेपी ने फिल्म की फंडिंग की होती तो 30 करोड़ की बजाए 300 से 400 करोड़ की बजट की फिल्म होती. हमारी फिल्म में बड़े स्टार कास्ट होते. उन्होंने कहा लव जिहाद शब्द बीजेपी ने ईजाद नहीं किया, बल्कि ईसाई पादरी का शब्द है. सबसे पहले केरल में ही चर्च के फादर ने लव जिहाद का केस रजिस्टर्ड करवाया था.
रिसर्च वर्क में लगे छह-सात साल
लेखक ने आगे कहा फिल्म रिलीज के बाद पूरी यूनिट को धमकियां जरूर मिल रही हैं. जिन लोगों का नेक्सेस चल रहा था उसको हमने एक्सपोज किया है. तो स्वाभाविक है कि उनको तकलीफ तो होगी. फिल्म लेखक सूर्यपाल सिंह धार के रहने वाले हैं. इंदौर में रहकर उन्होंने देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है. उन्होंने बताया कि फिल्म लिखने में 2 से 3 साल का समय लगा है. रिसर्च वर्क करने में डायरेक्टर ने छह-सात साल लगाए हैं. तब जाकर फिल्म तैयार हुई है. पूरी फिल्म सत्य घटनाओं पर आधारित है.
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FIRST PUBLISHED : May 15, 2023, 20:58 IST








