किसान ध्यान दें! इस विधि से करेंगे गन्ना की खेती तो 6 गुना बढ़ेगा उत्पादन, लागत भी आएगी कम

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आशीष कुमार/ पश्चिम चम्पारण. चम्पारण को गन्ना उत्पादकों का बेल्ट भी कहा जाता है. लेकिन इनदिनों जलवायु परिवर्तन के कारण गन्ने की खेती पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. इस स्थिति में गन्ने की खेती को लेकर किसान असहज महसूस कर रहे हैं. ऐसे में आज हम आपको गन्ने की खेती का एक ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं, जो आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा. खास बात यह है कि इस तरीके से पौधों के मुरझाने के चांसेस शून्य हो जाते हैं और उत्पादन भी पहले की तुलना में 6 गुना ज्यादा होता है.

गन्ना रोपण के लिए करें एसटीटी विधि का उपयोग

एक रिपोर्ट के अनुसार जिले में 50 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में गन्ने की खेती की जाती है. नरकटियागंज कृषि विज्ञान केंद्र के पौधा संरक्षण विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. गगन कुमार बताते हैं कि गन्ने की सफल खेती एवं कम लागत में अत्यधिक पैदावार के लिए किसानों को एसटीटी ( sugarcane transplanting Technic) अर्थात् गन्ना पौध प्रत्यारोपण विधि का इस्तेमाल करना चाहिए. पारंपरिक विधि से अलग इसमें गन्ने की एक आंख वाली बीज को 50 प्रतिशत मिट्टी, 25 प्रतिशत सफेद बालू तथा 25 प्रतिशत कोकोपिट के मिश्रण में लगाएंगे. खास बात यह है कि बीज को खेतों में नहीं बल्कि एक खास \” कैरेट\” (जिसे चीनी मिल या कृषि विज्ञान केन्द्र से भी लिया जा सकता है) में 35 से 40 दिनों के लिए लगाएंगे.

पौधे को कैरेट से निकालकर सीधे खेतों में लगाए

डॉ. गगन के अनुसार कैरेट में गन्ने का बीज रोपने के 35 से 40 दिनों के बाद पौधे को वहां से निकालकर खेतों में खुरपी या अन्य यंत्रों की मदद से लगाएंगे. कैरेट में रोपने पर कुछ दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि बीज पौधे में तब्दील हुआ या नहीं. यदि बीज मुरझा जाए तो उसे वहां से निकालकर दूसरा लगा दें. इसमें न तो आपको मेहनत करने की जरूरत है और न ही आपका समय बर्बाद होगा. कैरेट से निकलने वाला पौधा खेतों में पूरी तरह से सफल पैदावार देगा. ध्यान रखने वाली बात यह है कि एक आंख वाले बीज को कैरेट में रोपने से पहले उसे पंद्रह से 20 मिनट तक किसी अच्छे केमिकल या ट्राईकोडर्मा में डूबा कर रखना है. ताकि उनमें कीट या फंगस नहीं लगे. साथ ही रोपने के बाद कैरेट में नमी बनी रहनी चाहिए. ध्यान रहे कि इस विधि में लाइन से लाइन की दूरी 5 फीट तथा पौधे से पौधे की दूरी 2 फीट होती है.

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FIRST PUBLISHED : May 14, 2023, 19:50 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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