
रिपोर्ट : रामकुमार नायक
महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से दिल दहला देने वाली खबर है. यहां 15-20 दिन के दो नवजातों को झाड़-फूंक से इलाज के नाम पर कई बार गर्म सलाखों और अगरबत्ती से दागा गया. जब उनकी हालत बिगड़ गई तो उन्हें बसना के अग्रवाल नर्सिंग होम में ले जाया गया. वैसे, शुक्र है कि दोनों बच्चों की हालत अस्पताल में अब ठीक है.
ये दोनों मामले बसना के बड़ेडाभा और पिथौरा के ग्राम मोहगांव से सामने आए हैं. इनमें से एक बच्चे का पेट फूलना, तो दूसरे बच्चे को अलची बीमारी बता कर झाड़-फूंक करवाया गया. इस दौरान एक बच्चे के पेट को 12 बार गर्म सलाखों और अगरबत्ती से दागा गया, जबकि दूसरे बच्चे को 6 बार. इस वजह से दोनों बच्चों की हालत और गंभीर हो गई. हालात ज्यादा बिगड़ने पर दोनों बच्चों को जिले के अग्रवाल नर्सिंग होम बसना में भर्ती कराया गया है. अग्रवाल नर्सिंग होम बसना के डॉक्टर एनके अग्रवाल ने बताया कि दोनों बच्चों का उपचार चल रहा है और उनकी स्थिति अभी ठीक है.
बाद में बहुत तकलीफ हुई
बच्चे के पिता नीलमणि बारिक के मुताबिक, पुराने रीति-रिवाज और लोकमान्यता के अनुसार दागने से बच्चे की सेहत अच्छी रहती है, उसका पाचन तंत्र भी सही रहता है. इसलिए घरवालों ने बच्चे को दागा. बच्चे के पेट फूलने और शौच नहीं जाने की वजह से अग्रवाल नर्सिंग होम बसना में भर्ती कराया गया है. बच्चों को दागना सही नहीं है. बाद में बहुत तकलीफ हुई.
प्रशासन ध्यान दे
इस खबर को कवर करते वक्त जब बच्चे की हालत देखी, नवजातों की देह के जख्म देखे तो यह सवाल बहुत देर तक परेशान करता रहा कि आखिर ऐसा करते वक्त परिजनों का दिल क्यों नहीं पसीजा? वैसे इस तरह का मामला जिले में कोई पहली बार नहीं आया है. इससे पहले भी झाड़-फूंक, जादू-टोने, भगत और बैगा के बहकावे में इस तरह की करतूत लोग करते रहे हैं. इसलिए जरूरी है कि इस तरह के मामलों पर प्रशासन ध्यान दे.
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Tags: Crime News, Mahasamund News, Superstition
FIRST PUBLISHED : May 08, 2023, 15:57 IST








