
हाइलाइट्स
मणिपुर हिंसा का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है.
मणिपुर के हालात पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को याचिकाओं की सुनवाई करेगा.
केंद्र सरकार ने कहा कि वह मणिपुर में संघर्षरत समूहों के साथ बातचीत करने को तैयार.
नई दिल्ली. मणिपुर में भीषण हिंसा (Manipur Violence) के बाद अब कई जिलों में आम जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है. वहां पिछले एक हफ्ते से लगातार हिंसा हो रही थी. अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने की मांग को लेकर मेइती (Meitei Community) और आदिवासियों के बीच झड़पों के बाद पूर्वोत्तर का राज्य जातीय हिंसा से हिल गया था. यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गया है. मणिपुर के हालात पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई करेगा. इस बीच, उत्तर पूर्वी क्षेत्र के विकास के लिए केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि केंद्र मणिपुर में संघर्षरत समूहों के साथ बातचीत करने और उनके मुद्दों को हल करने के लिए तैयार है.
चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ (Chief Justice DY Chandrachud), जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी परदीवाला की सुप्रीम कोर्ट की बेंच सोमवार को मणिपुर की स्थिति पर याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई करेगी. पीठ तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी. जिनमें मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के मुद्दे पर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली भाजपा विधायक की याचिका और मणिपुर में हाल की हिंसा की एसआईटी जांच के लिए एक जनजातीय संगठन की जनहित याचिका भी शामिल है.
केंद्र संघर्षरत समूहों से बातचीत को तैयार
वहीं पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने संघर्षरत समूहों से बातचीत के लिए आगे आने की अपील की है. जी किशन रेड्डी ने कहा कि ‘कृपया मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने के लिए आगे आएं. सरकार बातचीत के लिए तैयार है. आपने किसानों के मुद्दे को देखा है. जब यह शांतिपूर्ण था, तो हमने उन्हें समझाने की कोशिश की. मुद्दा हल नहीं होने पर हम उनकी मांग पर सहमत हुए और वे बिल (तीन कृषि कानून) वापस ले लिए गए. इसलिए, सरकार कठोर नहीं है.’ उन्होंने कहा कि सरकार उन लोगों के हितों का ख्याल रखेगी जिन्हें हिंसा के कारण नुकसान पहुंचा है.
मुद्दों को बातचीत से सुलझाने की अपील
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘अगर उन्हें कोई समस्या है, तो इसे हल करना राज्य और केंद्र सरकारों की जिम्मेदारी है. हम सभी को संयम बनाए रखना चाहिए. हमें मुद्दों को बातचीत से सुलझाना चाहिए, न कि हिंसा से। हिंसा से कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता है.’ गौरतलब है कि मणिपुर में मेइती समुदाय और आदिवासियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं. जिनमें 50 से अधिक लोगों की जान चली गई. हिंसा प्रभावित इलाकों से बचाकर 23,000 लोगों को सैनिक शिविरों में ले जाया गया. हालात पर काबू में रखने के लिए सेना और असम राइफल्स के जवानों को हिंसा प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है.
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Tags: Central government, Manipur, Manipur News, Supreme Court
FIRST PUBLISHED : May 08, 2023, 08:34 IST








