Bihar: शराबबंदी कानून में ढील के क्या हैं मायने, चुनाव को देखते हुए नीतीश सरकार कर रही ऐसा !

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पटना. बिहार में शराबबंदी कानून लागू है लेकिन इस कानून में कुछ ऐसी ढिलाई दी गई है जिससे ये सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या बिहार में लागू शराबबंदी कानून कमजोर होता जा रहा है. आखिर इस सवाल के पीछे वो वजह क्या है जिसके आधार पर बीजेपी सवाल उठा रही है कि आने वाले समय में बिहार में शराबबंदी कानून खत्म हो जाएगा. इन सब के बीच बीजेपी नेता सुशील मोदी ने नीतीश कुमार को गुजरात के तर्ज पर बड़ा सुझाव भी दे दिया है.

दरअसल बिहार में 2016 में शराबबंदी कानून लागू किया गया था और जब ये कानून लागू किया गया था तब ये बेहद कड़ा था. कानून की कड़ाई का इसी से अन्दाजा लगाया जा सकता है कि जिस घर से शराब पकड़ाए वो घर जब्त कर लिया जाता था. जिस वाहन से शराब पकड़ाया वो वाहन जब्त हो जाता था. बेचने वाले से लेकर पीने वाले को सीधे जेल भेज दिया जाता था लेकिन इस कानून में समय-समय के साथ कई ढील दी गई और आज ढिलाई का आलम ये है कि जो छूट दी गई है इससे सवाल खड़े होने लगे हैं कि क्या आने वाले लोकसभा चुनाव के पहले शराबबंदी नाम मात्र की बिहार में रह जाएगी.

शराब बंदी कानून के तहत कुछ ऐसे नियम थे जिसकी वजह से सरकार की काफी फजीहत भी होती रही है लेकिन एक के बाद एक शराबबंदी क़ानून में ढील दी गई. इस पर उत्पाद मंत्री सुनील कुमार सफाई देते हैं और कहते हैं कि कानून में समय-समय पर बदलाव होता रहता है और ये सब जनता के हित के लिए ही होता है. अगर आगे जरूरत पड़ी तो और भी बदलवा हो सकता है. इस मामले में बीजेपी नेता सुशील मोदी ने चुटकी ली है.

आपके शहर से (पटना)

मोदी ने नीतीश कुमार के शराबबंदी कानून को फेल बताया और सुझाव दिया कि शराबबंदी संबंधी 4 लाख मुकदमे वापस लेकर आम माफी दे साथ ही गुजरात की तरह पर्यटकों, बीमारों के लिए शराब का परमिट जारी किया जाए. उन्होंने कहा कि यदि अपनी जिद छोड़कर नीतीश कुमार शराब की परमिट व्यवस्था लागू करें तो इससे बिहार का राजस्व बढेगा. तस्करी पर अंकुश लगेगा और पर्यटन उद्योग में रोजगार के अवसर भी बढेंगे.

Tags: Bihar News, Liquor Ban, New Liquor Policy, Nitish kumar

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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