
नाट्य संस्था ‘मैलोरंग’ ने अपने वार्षिकी ‘नेपथ्य रंग सम्मान’ की घोषणा कर दी है. इस बार यह सम्मान लखनऊ के दो रंगकर्मियों को प्रदान किया जाएगा. लखनऊ के शशांक बहुगुणा और आतमजीत सिंह को इस सम्मान के लिए चुना गया है. ‘नेपथ्य रंग सम्मान’ के लिए गठित चयन समिति ने तमाम अध्ययनों के बाद पुरस्कार के लिए रंगकर्मियों के नाम का ऐलान किया.
‘नेपथ्य रंग सम्मान’ के लिए गठित कार्य समिति में संजय सहाय, अमिताभ श्रीवास्तव, प्रीता माथुर ठाकुर, सत्यव्रत राउत और देवेंद्र राज अंकुर जैसे प्रतिष्ठित रंगकर्मी, लेखक और निर्देशक शामिल हैं. इस वर्ष चयन समिति ने दूसरे और तीसरे ‘नेपथ्य रंग सम्मान’ की घोषणा एक साथ की है. यह महज संयोग है कि दोनों विशेषज्ञ लखनऊ के निवासी हैं.
शशांक बहुगुणा ने भारतीय रंगमंच में ‘मनो-शारीरिक रंगमंच’ नाम की रंगशैली में वर्षों तक लगातार काम किया हैं. आतमजीत सिंह ने चिर–परिचित नौटंकी लोक नाट्य शैली में नए–नए समसामयिक आलेखों के मंचन के माध्यम से उस रंग शैली का पुनराविष्कार किया है.
इस वर्ष सम्मान समारोह 03 जून, शनिवार को लखनऊ में ही आयोजित किया जा रहा है. सम्मान समारोह लखनऊ की सुप्रसिद्ध नाट्य मंडली ‘नीपा’ और भारतेन्दु नाट्य अकादमी के संयुक्त तत्त्वावधान में भारतेन्दु नाट्य अकादमी के परिसर में आयोजित किया जाएगा. इस अवसर पर भारतीय रंगमंच के वरिष्ठ पद्मश्री रंग निर्देशक राज बिसारिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे.
बता दें कि जिस प्रकार नाटक में कहानी, दिग्दर्शन और अभिनय का जितना महत्व होता है, उतना ही नेपथ्य का होता है. नेपथ्य नाटक के पर्दे के पीछे का स्थान होता है. यह रंगमंच का वह भाग है जो दर्शकों की दृष्टि से ओझल रहता है और जिसमें अभिनेता अपना रूप धारण करते हैं तथा सजते हैं. पुराने समय में रंगमंच के परदों पर बड़े-बड़े महल, बाग-बागीचों, नदी-पहाड़ आदि की चित्रकारी हुआ करती थी. दृश्य के अनुसार परदे ऊपर खींच कर अलग-अलग प्रसंगों के अनुसार पर्दे प्रस्तुत किए जाते थे. अंग्रेजी में इसे बैक स्टेज या ड्रैसिंग रूम कहते हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 01, 2023, 20:53 IST








