लगातार मोबाईल देखने से आंखों पर पड़ रहा बहुत बुरा प्रभाव, आंखों में जलन ,धुंधला दिखने सर दर्द जैसी हो रही समस्याएं

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कौशाम्बी— अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कौशांबी जिले के मंझनपुर नगर इकाई द्वारा देश में बढ़ रहे स्क्रीन टाइम को देखते हुए स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय कौशांबी में स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक कौशांबी  राजेश कुमार ,मुख्य वक्ता प्रांत मंत्री शिवम सिंह ,विशिष्ट अतिथि डॉ विवेक पांडेय, विद्यार्थी परिषद के जिला प्रमुख प्रोफेसर प्रबोद श्रीवास्तव ,एवं मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉक्टर सुनील शुक्ला ने ज्ञान की देवी मां सरस्वती युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा पर दीप जलाकर विधिवत संगोष्ठी का शुभारंभ किया। विद्यार्थियों कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बताया आज लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ बैठने के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं रिश्तो में दूरी बढ़ती जा रही है बच्चे बाहर खेलने छोड़कर घर में वीडियो गेम खेलने लगे हैं जिससे उनमें आत्मविश्वास और सामाजिक व्यवहार की कमी देखी जा रही है इतना ही नहीं प्रकृति से दूरी बढ़ने के कारण हम पर्यावरण के महत्व को भी भूलते जा रहे हैं ।यही कारण है कि आज प्रदूषण ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं हमारे सामने खड़ी है यह सारी समस्याएं आम नहीं है दिखने में तो आम है पर आम नहीं है आज समाज एक और तीव्र तकनीकी प्रगति का साक्षी बन रहा है। वहीं दूसरी ओर मोबाइल फोन सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का अनियंत्रित उपयोग युवाओं को सामाजिक अलगाव मानसिक संतुलन और नैतिक विचलन की ओर धकेल रहा है। संवेदनशीलता, पारिवारिक संवाद और नैतिक मूल्यों में निरंतर क्षरण हो रहा है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम युवाओं को वास्तविक जीवन से काट रहा है जिससे उनके भीतर सहानुभूति, आत्म संयम और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना कमजोर पड़ रही है।
मुख्य वक्ता के रूप में प्रांत मंत्री शिवम सिंह ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए बताया कि हम सब या भली-भांति जानते हैं कि आज का युग विज्ञान और तकनीकी का युग है मोबाइल, फोन ,कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट और टीवी ने हमारे जीवन को बहुत आसान बना दिया है पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक खरीदारी से लेकर बातचीत तक सब कुछ एक स्क्रीन के जरिए संभव हो गया है लेकिन सुविधा के साथ-साथ अगर किसी भी क्रिया का अति प्रयोग किया जाए तो वह चीज हमारे लिए नुकसानदायक भी हो जाती है आज की सबसे बड़ी समस्या यही है कि हम जरूर से ज्यादा स्क्रीन टाइम में उलझते जा रहे हैं और प्रकृति यानी ग्रीन टाइम से दूर होते जा रहे हैं प्रश्न उठता है। स्क्रीन टाइम क्या है स्क्रीन टाइम का अर्थ है मोबाइल टीवी कंप्यूटर या किसी भी डिजिटल स्क्रीन के सामने बिताया गया समय आज बच्चे हो या बड़े सुबह उठते ही मोबाइल देखते हैं और रात को सोने से पहले भी मोबाइल हमारे हाथ में होता है या आदत धीरे-धीरे हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी है लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। आंखों में जलन ,पानी आना ,धुंधला दिखने और सर दर्द जैसी समस्याएं आम हो गई हैं बच्चों में कम उम्र में ही चश्मा लगा अब सामान्य बात हो गई है। इसके अलावा लंबे समय तक बैठकर मोबाइल या लैपटॉप चलाने से गर्दन पीठ दर्द और रीड की हड्डी से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ रही है हर विद्यार्थी का यह कर्तव्य बनता है की मोबाइल फोन हो या कंप्यूटर हो टीवी हो इसको लिमिट में चलाएं तो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहेगा। विशिष्ट अतिथि डॉ विवेक पांडेय ने बताया की अधिक स्क्रीन टाइम के कारण तनाव ,चिंता, चिंड़चिड़ापन ,और अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ रही है सोशल मीडिया पर दूसरों की जिंदगी देखकर हम अपनी जिंदगी से असंतुष्ट होने लगते हैं। नींद की कमी भी एक बड़ी समस्या है क्योंकि देर रात तक मोबाइल चलाने से हमारा दिमाग आराम नहीं कर पाता


इसका संतुलन बनाए रखने के लिए पहले उपाय यह है कि टेक्नोलॉजी का उपयोग करें लेकिन सीमित मात्रा में हमें तकनीकी का उपयोग न्याय पूर्ण ढंग से करने हैं तकनीकी को और नियंत्रित और संतुलन से बाहर नहीं जाने देना है यही तो इसकी उपयोगिता को तय करेगा कि हम तकनीकी का बेहतर उपयोग कर पा रहे हैं या नहीं हमें तकनीक के उपयोग करना है उपभोग नहीं । दिन में कुछ समय ऐसा तय करें जब आप मोबाइल और अन्य स्क्रीन से पूरी तरह दूर रहें हम अपने स्वयं के बारे में और अपने कर्तव्यों के बारे में प्रतिदिन विचार करें हमने आज क्या खाया क्या पाया इससे क्या अगले दिवस के लिए हमारे मन में सकारात्मक विचारों की उत्पत्ति होगी और हमारी सार्थकता बढ़ेगी साथ ही बाहरी गतिविधियों को बढ़ावा देना होगा इसके लिए हर दिन काम से कम 30 मिनट पार्क में पहले खेल या योग करें इससे हम स्वस्थ भी रहेंगे और हमारे यहां तो कहां स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण होता है। विद्यार्थी परिषद के जिला प्रमुख प्रोफेसर प्रबोध श्रीवास्तव ने बताया की स्क्रीन हमारे जीवन को आसान बनाती है लेकिन प्रकृति हमारे जीवन को अर्थ देती है प्रेरणा देती है हमारा पालन पोषण करती है और प्रकृति की गोद में ही तो हम अपना संपूर्ण जीवन और यह सृष्टि चलती सच्चे अर्थों में प्रकृति तो हमारी मां है और मां के संवर्धन और संरक्षण का दायित्व हम सबका है । कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएमएस डॉक्टर सुनील शुक्ला ने किया उन्होंने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया और ऐसे कार्यक्रमों को निरंतर समाज में करने का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी से आग्रह किया उन्होंने कहा ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों का जीवन में प्रेरणा देते हैं। इस दौरान पूर्व विभाग संयोजक ऋषभ द्विवेदी, जिला संगठन मंत्री अश्वनी सिंह, जिला संयोजक शिवांशु शुक्ला, विभाग छात्रा प्रमुख अंतरा केसरवानी, प्रांत कार्यकारिणी सदस्य गौरव मिश्रा, आनंद सिंह पटेल ,प्रांत एसएफडी संयोजक सुशील कुमार सोनकर, सिराथू तहसील सहसंयोजक पवन भट्ट ,मंझनपुर तहसील सह संयोजक वंश केसरवानी , चायल तहसील संयोजक प्रशांत मणि पांडेय, इकाई अध्यक्ष अनुराग पांडेय, पूर्व प्रांत एसएफडी सह संयोजकअभिराज सिंह, नगर अध्यक्ष सराय अकिल दिनेश जायसवाल ,नगर अध्यक्ष सिराथू संगम लाल तिवारी, नगर सह मंत्री मंझनपुर आकृति द्विवेदी, नगर सह मंत्री भरवारी सुहाना केसरवानी सहित सैकड़ो की संख्या में कार्यकर्ता विद्यार्थी एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

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Author: Up Head Line

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