कौशाम्बी-
उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में कोखराज थाना क्षेत्र के भरवारी कस्बे में मकान पर जबरन कब्जा कराने और कूट रचित कागजातों के माध्यम से नगर पालिका में खसरा रजिस्टर में नाम चढ़ाने के आरोप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर कोखराज थाना में भरवारी के 3 पूर्व चेयरमैन सपा नेता और बीजेपी के पूर्व विधायक संजय गुप्ता चायल सहित 7 के खिलाफ विभिन्न कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस मुकदमा दर्ज कर जांच में जुट गई है.
कोखराज थाना क्षेत्र के भरवारी कस्बा की रहने वाली पीड़ित महिला राजदुलारी पत्नी उमाशंकर ने मुख्यमंत्री जनता दर्शन मे पहुंच कर शिकायत करते आरोप लगाया कि उनके पति की मौत बाद बीजेपी के पूर्व चेयरमैन एवं बीजेपी के पूर्व विधायक चायल संजय गुप्ता, पूर्व चेयरमैन व 2012 मे हुए विधानसभा चुनाव में सिराथू विधानसभा से सपा प्रत्याशी/ प्रदेश सचिव कैलाश चंद्र केसरवानी, इनकी पत्नी पूर्व चेयर मैन सुनीता केसरवानी ने अपने राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव के चलते नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी पर दबाव बनाकर उनके मकान पर विपक्षियों का नाम दर्ज करा दिया और मकान कर जबरन विपक्षियों को कब्जा करा दिया है।
आरोप लगाया कि उच्च अधिकारियों से शिकायत के बावजूद नगर पालिका ईओ राम सिंह एवं नगर पालिका प्रशासन उन्हें RTI का जवाब नहीं दे रहा है,जिसकी शिकायत शासन एम की गई थी,लेकिन की सुनवाई नहीं हुई,जिसके बाद पीड़िता ने उसकी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है।
महिला का आरोप है की पति उमाशंकर केशरवानी पुत्र स्व मोतीलाल केभारवानी व्यक्तिगत आय से वर्ष 1970 में नगर पंचायत वर्तमान नगर पालिका परिषद भरवारी से एक जमीन निलामी में खरीद कर उस पर तीन मंजिला भवन का निर्माण कराया, इसके अलावा सन् 1979 तथा 1990 में भी जमीन खरीद कर उस मकान बनवाया जिसे बाद में आर्थिक तंगी के कारण उनके द्वारा विक्रय कर दिया गया। परन्तु सन् 1970 में ली गयी जमीन व उस बने मकान को विक्रय नहीं किया गया। पीड़िता के ससुर मोतीलाल (नेहरू जी) की पहली पत्नी कमला देवी का देहान्त होने के बाद उन्होंने दुसरा विवाह कुलझारा देवी से किया था। जिससे प्रार्थिनी के पति उमाशंकर केशरवानी सहित पाँच पुत्र तथा चार बेटी पैदा हुई हैं। पति उमाशंकर केशरवानी की भी मृत्यु 06.05.2004 को हो गई। पति की मृत्यु के बाद उसके निजी भवन जोकि व्यस्त बाजार के बीच में स्थित है पर सफेदपोश भू-माफिया तत्कालीन चेयरमैन कैलाश चन्द्र केशरवानी की नजर थी, परन्तु प्रार्थिनी के पति के जीवित रहते कुछ नहीं कर पा रहा था। उनकी मृत्यु के बाद उसने दिलीप व अजय व विजय व संजय जोकि बम्बई में रहते थे उनको बुलाकर उन्हें सह देकर तथा फर्जी कागजात तैयार कराकर प्रार्थिनी के पति कि कि तीस वर्ष (30) पूर्व मृत्यु दिखाकर प्रार्थिनी के गैर जानकारी में मकान पर प्रार्थिनी के पति के व्यक्तिगत धन से निर्मित मकान पर उन लोगों का नाम नगर पंचायत अध्यक्ष कैलाश चन्द्र केशरवानी द्वारा बिना अधिकार के 2005 में फर्जी तौर से दर्ज कर दिया. इसकी जानकारी होने पर जब इसका विरोध किया तो कैलाश चन्द्र केशरवानी द्वारा अपने आराजक साथियों से प्रार्थिनी एवं उसके बच्चों को पीटवा कर घर से बाहर निकाल दिया.
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद कोखराज थाना पुलिस ने देर रात भरवारी के पूर्व चेयरमैन कैलाश चंद्र केसरवानी,उनकी पत्नी पूर्व चेयरमैन सुनीता केसरवानी,पूर्व चेयरमैन भरवारी एवं पूर्व विधायक चायल संजय गुप्ता , दिलीप,अजय,विजय,संजय के खिलाफ BNS की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.









