मरहूमा के चेहल्लुम की मजलिस में अश्कबार हुईं आंखें

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मरहूमा के चेहल्लुम की मजलिस में अश्कबार हुईं आंखें

करारी के लहना गांव में सोमवार को मरहूमा कनीज फातिमा सोगरा के चालीसवें की मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को मौलाना सैयद गुलजार हुसैन जाफरी अजमेरी ने खिताब किया। मजलिस में मौजूद लोगों ने मरहूमा के बेटों को पुरसा दिया।
मजलिस की शुरुआत सोजख्वानी से की गई। सोजख्वानी महताब हुसैन मुस्तफाबादी ने पढ़ी। इसके बाद हसन रिजवी और जापुर जाहिद आदि शायरों ने ताजियाती नज्म पेश की। तासेरात आली जनाब मौलाना मोहम्मद रजा सोनवी ने किया। अजमेर से आए मौलाना सैयद गुलजार हुसैन जाफरी मजलिस को खिताब करते हुए बताया कि इंसान मर जाता है लेकिन उसका किरदार हमेशा जिंदा रहता है। मरने के बाद भी वह जिंदों को सवाब देता रहता है। उन्होंने आखिरी नबी की बेटी फातिमा की सीरत बयां करते हुए महिलाओं से उनकी सीरत से सबक लेने और उनके नक्शे कदम पर चलने की सलाह दी। कहा फातिमा जहरा का जीवन औरतों के लिए मिसाल बना। उन्होंने महिलाओं को इबादत के साथ नेक तरीके से जिंदगी गुजारने का सलीका बताया। अंत में उनके साथ हुए जुल्म को बयान किया जिसे सुनकर लोगों की आंखें भर आईं मौलाना का बयान सुनकर अजादार जारो-कतार रोने लगे। मजलिस के बाद मौजूद लोगों ने बेटों को पुरसा दिया। निजामत आली जनाब मौलाना शारिफ मझियांवी ने किया।

REPORT: SHABBAR ALI 

Up Head Line
Author: Up Head Line

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