‘पीएम श्री’: रकम डंप, जारी करने में आनाकानी कर रहे अफसर! -स्कूलों को अब तक सिर्फ एक किस्त ही दे सका है विभाग

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‘पीएम श्री’: रकम डंप, जारी करने में आनाकानी कर रहे अफसर!

-स्कूलों को अब तक सिर्फ एक किस्त ही दे सका है विभाग

-जिले के आठ स्कूलों का पीएम श्री योजना में हुआ है चयन

हिमांशु भट्ट/मो.यासीन

कौशांबी। शासन की प्राथमिकता वाली ‘पीएम श्री’ योजना कौशांबी जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों की मनमानी का शिकार हो गई है। चयनित स्कूलों को रकम डंप होने के बाद भी अग्रिम किस्त नहीं दी जा रही है। अब तक सिर्फ एक ही किस्त जारी की गई है। बाकी रकम नहीं मिलने से आगे का कार्य ठप पड़ा है। इसे लेकर छात्र और अभिभावक खासे मायूस हैं। शिक्षा का स्तर भी निखर नहीं पा रहा है। इतनी बड़ी मनमानी क्यों की जा रही है? इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
पीएम श्री योजना के तहत जिले में सभी आठ विकास खंड क्षेत्रों के एक-एक स्कूल का चयन किया गया है। इन स्कूलों में शुद्ध पेयजल, विज्ञान, गणित, भाषा विषय की लैब, बाल वाटिका, स्पोर्ट्स, दिव्यांग शौचालय, कम्प्यूटर कोर्स आदि की व्यवस्था की जानी है। व्यवस्था के लिए शासन की ओर से समय पर रकम भेजी जा रही है। आरोप है कि जिले के अधिकारी इस रकम पर कुंडली मारकर बैठे हैं। पहली किस्त 15 मार्च 2024 के आसपास स्कूलों के प्रधानाचार्यों को दी गई थी। उन्हीं को निर्माण कराने का जिम्मा सौंपा गया है। दूसरी किस्त शासन से मिलने के बावजूद जनपद के अधिकारी स्कूलों को नहीं दे रहे हैं। वह ऐसा क्यों कर रहे हैं? यह किसी से छिपा नहीं है। शिक्षकों के बीच तमाम तरह की चर्चा है। उधर, रुपया नहीं मिलने से प्रधानाचार्य आगे का काम नहीं करा पा रहे हैं। परिणाम है कि नौनिहालों को शासन की मंशा के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था नहीं मिल पा रही है।
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निर्माण में मानक की जमकर अनदेखी
योजना में चयनित प्रत्येक स्कूल को पहली किस्त के तौर पर 6.23 लाख रुपये दिए गए हैं। चर्चा है कि इस रकम का कुछ स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने सदुपयोग किया है। कुछ ने निर्माण में जमकर मानक की अनदेखी की है। मंझनपुर ब्लॉक के पवैया स्कूल की बात करें तो अभी तक नींव भर खुदवाई जा सकी है। चायल ब्लॉक के शेखपुर रसूलपुर में सिर्फ दिव्यांग शौचालय का निर्माण कराया गया है। सरसवां के बक्सीपार और कड़ा के निजाममई स्कूल का हाल यह है कि महज पांच सूत की एक सरिया पर भवनों के पिलर खड़े कर दिए गए हैं। ग्रामीण यह बात चीख-चीखकर कह रहे हैं। फिर भी कराए गए निर्माण के मानक की जांच करने वाला कोई नहीं है।
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अन्य जिलों में खत्म होने के कगार पर काम
पीएम श्री योजना का कौशाम्बी जिले में ही हाल बदहाल है। बांदा, रायबरेली और पड़ोसी जनपद प्रतापगढ़ की बात करें तो स्कूलों को तीन किस्तें दी जा चुकी हैं। चौथी किस्त कभी भी दी जा सकती है। परिणाम है कि इन जनपदों में काम खत्म होने के कगार पर है।
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कमीशन के खेल की चर्चा जोरों पर
स्कूलों को किस्त नहीं देने को लेकर शिक्षकों के बीच तमाम तरह की चर्चा हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर शिक्षक यहां तक बताते हैं कि विभागीय जिम्मेदार 14 प्रतिशत तक कमीशन मांग रहे हैं। प्रधानाचार्य इतना ज्यादा देने को तैयार नहीं हैं। इसी वजह से किस्त जारी करने में हीलाहवाली की जा रही है।
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इन स्कूलों का हुआ है चयन
सरसवां ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय बक्सीपार, कड़ा के कंपोजिट विद्यालय निजाममई, कौशाम्बी के कंपोजिट विद्यालय जाठी, सिराथू के प्राथमिक विद्यालय सौरई खुर्द, मंझनपुर के प्राथमिक विद्यालय पवइया, मूरतगंज के प्राथमिक विद्यालय जलालपुर बोरियो, नेवादा के प्राथमिक विद्यालय अमिरसा, चायल के प्राथमिक विद्यालय शेखपुर रसूलपुर का चयन पीएम श्री योजना में किया गया है।
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अहम सवाल
-पहली किस्त मार्च में जारी की गई तो उसे खर्च करने की समय सीमा क्यों नहीं तय की गई ?
-6.23 लाख रुपयों से काम कराने में आखिर कितना वक्त लगा ?
-पहली किस्त के 6.23 लाख रुपयों से महीने भर के भीतर ही निर्माण कार्य करा दिया होगा, फिर सत्यापन कराने में देरी क्यों की गई ?
-निर्माण के दौरान औचक निरीक्षण कर गुणवत्ता क्यों नहीं परखी गई?
-लापरवाही करने वाले प्रधानाचार्यों और अफसरों पर आखिर क्या कार्रवाई होगी ?
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इनका कहना है
जिलाधिकारी ने पहली किस्त से स्कूलों में कराए गए कार्यों का भौतिक और तकनीकी सत्यापन कराने के लिए टीम गठित की है। सत्यापन के बाद अगली किस्त भेज दी जाएगी। निर्माण में गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई होगी।
-वीरेंद्र कुमार, जिला समन्वयक, निर्माण

Up Head Line
Author: Up Head Line

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