प्रयागराज
जब किसी परिवार के एक सदस्य को कोई दिक्कत हो जाए और परिवार के सदस्य के जख्म वाली जगह पर कीड़े लग जाए तब परिवार को लगता है कि अब उसके परिवार का सदस्य बच नहीं पाएगा क्योंकि शरीर के उस खराब अंग में कीड़े लग गए है वो भी परिवार का वह सदस्य उम्र का एक पड़ाव पर कर चुका हो तकरीबन 70 साल की उम्र का हो तो ऐसे में परिवार के सदस्य हिम्मत खो बैठते हैं। लेकिन उस परिवार की उम्मीद पर खरा एक डॉक्टर उतरता है क्योंकि कहा जाता है एक डॉक्टर किसी भगवान से कम नहीं शायद मध्य प्रदेश के रीवा के रहने वाले उस परिवार के लिए डॉक्टर राजीव सिंह किसी भगवान से कम साबित हुए है।
मध्य प्रदेश के रीवा के रहने वाले भइया लाल केवट अपने परिवार के सबसे बुजुर्ग है और उनके परिवार में पत्नी और सात बेटियां है। बुजुर्ग मजदूरी का काम करता है और उसके गुदा द्वार में ना रहा था या नहीं उसे बवासीर हो गया था। परिवार किसी तरह उसको डॉक्टर के पास लेकर पहुंचा लेकिन एक अस्पताल फिर दूसरे अस्पताल उसके बाद तीसरे अस्पताल में भी गया है लेकिन उसे राहत नहीं मिली। परिवार ने उसे फिर प्रयागराज के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया जब डॉक्टर की टीम ने भईया लाल केवट बुजुर्गों को चेक किया तो डॉक्टर भी चौंक गए। क्योंकि बुजुर्ग के ब्लड आने वाली जगह पर कीड़े पड़ गए थे जिसको देखकर डॉक्टर के साथ उसके परिवार भी दंग थे।
गोल्ड मेडलिस्ट डॉ राजीव सिंह के मुताबिक इस तरह का मामला उनके पास पहली बार आया है क्योंकि ऐसे मामले 100 से अधिक को वह ऑपरेट भी कर चुके हैं लेकिन गुदा द्वार यानी बवासीर होने वाली जगह पर मरीज के ढेर सारे कीड़े पड़ गए बाकायदा कीड़े ऊपर दिख रहे थे जिसे देखकर आश्चर्य लगा और उसके बाद इलाज शुरू कर एक-एक कीड़े को निकलना पड़ा। लेकिन कई घंटे प्रयास के बाद इन सारे कीड़ों को निकाल दिया गया। डॉ राजीव सिंह के मुताबिक मेडिकल साइंस में इस तरह की चीज मैंने पहली बार देखी मैंने बहुत से ऐसे केस देखें और 100 से अधिक सुलझाया भी हैं लेकिन अपने में ये बहुत आश्चर्यचकित कर देने वाला मामला था। और बुजुर्ग किस तरह से इस पीड़ा को सहन कर रहा था यह भी एक बड़ी बात थी। फिलहाल हम लोगों ने उसे ऑपरेट कर सारे कीड़े निकाल दिए और अब बुजुर्ग बिल्कुल सही है और स्वस्थ भी है।
वही भैया लाल केवट के परिवार के लोग डॉक्टर के द्वारा दिखाए गए कीड़ों को लेकर बहुत परेशान हो गए साथ ही अपनों को खोने का गम भी सताने लगा। भईया लाल की बेटी और दामाद कहते हैं कि हम लोग ने उम्मीद को खो दी थी क्योंकि जिस तरह की हमें चीज दिखाई गई उसको देखकर हम लोग घबरा गई थी लेकिन हम लोग ने सोच लिया था कि अपने पिताजी के इलाज चाहे जमीन बेचनी पड़े हम करवा कर रहेंगे लेकिन हम लोग डॉक्टर साहब के शुक्रगुजार हैं। जिन्होंने सफल ऑपरेशन करना हमारे पिता को नई जिंदगी दी है हम लोग आर्थिक रूप से कमजोर भी थे लेकिन डॉक्टर साहब की वजह से हमारे पिताजी के साथ सस्ते में इलाज भी हो गया और आज हमारे पिताजी को नई जिंदगी मिल गई हम डॉक्टर साहब को थैंक यू कहते हैं। क्योंकि डॉक्टर हमारे लिए किसी भगवान से कम नहीं है।
प्रयागराज के धूमनगज के नारायण स्वरूप हॉस्पिटल के निदेशक डॉक्टर राजीव सिंह गोल्ड मेडलिस्ट हैं। इसके अलावा कई मेडिकल के क्षेत्र में इनाम भी पा चुके हैं अभी हाल ही में उन्होंने एक 7 साल के बच्चे के गले में सिक्का फस गया उसको दूरबीन विधि के द्वारा निकाल कर बाहर किया तो वहीं परिवार भी डॉक्टर के इस करनामें से बहुत खुश है। आपको बता दे प्रयागराज के गोल्ड मेडलिस्ट डॉक्टर राजीव सिंह का इस तरह का कमाल पहली बार नहीं है इससे पहले कई मेडिकल साइंस में कमाल कर चुके हैं। जो मेडिकल की दुनिया में अपने में एक अजूबा से कम नहीं है।
मो0 यासीन/कौशाम्बी





