बेटे का हांथ-पैर बांध पिटाई के मामले में CWC ने मुकदमा दर्ज करने का दिया आदेश

 

कौशांबी

इंस्पेक्टर को पत्र जारी कर आरोपी पिता के खिलाफ केस दर्ज कर बालक को प्रस्तुत करने का दिया निर्देश

  • चरवा थाना इलाके के एक गांव में गुरुवार को मासूम बेटे का हांथ-पैर बांधकर पिता ने लाठियों से था पीटा

चरवा थाना क्षेत्र के गढ़वा गांव में एक निर्दयी पिता ने अपने दस साल के बेटे को तालिबानी सजा दी है। बेटे की पिटाई का वीडियो किसी ने बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर पुलिस ने आरोपी पिता को हिरासत में लेकर निरोधात्मक कार्रवाई करते हुए उसका चालान कर दिया। मामले को संज्ञान में लेते हुए बाल कल्याण समिति ने इंस्पेक्टर को पत्र जारी कर आरोपी पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर बालक को 24 घंटे के अंदर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
गढ़वा गांव निवासी एक युवक मजदूरी कर परिवार का गुजारा करता है। परिजनों के मुताबिक उसका 10 वर्षीय बेटा कुछ शरारती है। गुरुवार शाम युवक घर पहुंचा तो उसका बेटा शैतानी करने लगा। इसी से नाराज होकर निर्दयी पिता ने मासूम बेटे के हांथ-पैर रस्सी से बांधकर जमीन पर पटक दिया और लाठी से उसकी पिटाई करने लगा। इसी दौरान किसी ने पिटाई की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। मासूम की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर पुलिस आरोपी पिता को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई करते हुए मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। शुक्रवार को मामला बाल कल्याण समिति के संज्ञान में आने पर अध्यक्ष कमलेश चंद्र ने इंस्पेक्टर को पत्र जारी करते हुए 24 घंटे के अंदर बालक को सीडब्लूसी के समक्ष प्रस्तुत करने ओर आरोपी पिता के खिलाफ जेजे एक्ट की धारा 75 के तहत मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है।
*बालक के प्रति क्रूरता के लिए दण्ड*
जो कोई, किसी बच्चे का वास्तविक प्रभार या उस पर नियंत्रण रखते हुए, उस पर हमला करता है, छोड़ देता है, दुव्र्यवहार करता है, उजागर करता है या जानबूझकर उसकी उपेक्षा करता है या बच्चे पर हमला करने, त्यागने, दुव्र्यवहार करने, उजागर करने या उपेक्षा करने का कारण बनता है या खरीदता है। ऐसे बच्चे को अनावश्यक मानसिक या शारीरिक कष्ट देने पर तीन साल तक की कैद या एक लाख रुपये का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। बशर्ते कि यदि यह पाया जाता है कि जैविक माता-पिता द्वारा बच्चे का ऐसा परित्याग उनके नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण है, तो यह माना जाएगा कि ऐसा परित्याग जानबूझकर नहीं है और इस धारा के दंडात्मक प्रावधान ऐसे मामलों में लागू नहीं होंगे। बशर्ते कि यदि ऐसा अपराध किसी ऐसे संगठन में कार्यरत या प्रबंधन करने वाले व्यक्ति द्वारा किया जाता है, जिसे बच्चे की देखभाल और सुरक्षा सौंपी गई है, तो उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है, और जुर्माना भी पांच लाख रुपये तक का लगाया जा सकता है।
*इनका कहना है*
किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 75 के अंतर्गत अगर कोई व्यक्ति, संरक्षक, कोई सामाजिक संस्था संचालक (होस्टल, बाल गृह आदि) किसी बालक (किशोर) के साथ कू्ररता का व्यवहार करेगा, उस पर हमला करेगा, उसे गृह निवास से भगाएगा, उसे उत्पीड़न करेगा या किसी भी प्रकार से डॉटेगा जिससे उसके अंदर डर बैठ जाए तब ऐसा करने वाला व्यक्ति अधिनियम की धारा 75 के अंतर्गत दोषी होगा।
कमलेश चंद्र, अध्यक्ष सीडब्लूसी

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Comment

Read More