उड़ीसा नहीं रेवाड़ी में है जगन्नाथ पुरी का सबसे पुराना मंदिर, कुतुबुद्दीन ऐबक ने डाला था डेरा, जानिए इसकी खासियत

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पवन कुमार/ रेवाड़ी: हरियाणा अपनी खूबसुरती और प्राचीन स्थलों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. यहां के कोने-कोने में इतिहास की कहानियां बसी है. इसी कड़ी में हम आपको हरियाणा के जगन्ननाथ मंदिर की कहानी बताएंगे ,मान्यता के अनुसार रेवाड़ी में स्थित ये जगन्ननाथ मंदिर उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी मंदिर से भी अधिक प्राचीन है. जहां आज भी कई श्रद्धालु दूर-दूर से मंदिर में दर्शन करने आते हैं इतिहास के जानकार बताते हैं कि रेवाड़ी शहर के बाराहज़ारी स्थित जगन्ननाथ जी मंदिर 1010 ई. से भी पुराना है.

जानकारी के अनुसार उस समय मोहम्म्द गजनवी के सेना नायक इब्राहिम बाराहज़ारी रेवाड़ी के जगन्ननाथ मंदिर को लूटने आया था. और वो यहां मारा गया . जिसके बाद कुतुबुद्दीन ऐबक रेवाड़ी आया. रेवाड़ी शहर में अभी भी कुतुबूपुर मोहल्ला है उस वक्त कुतुबुद्दीन ऐबक ने वहां छावनी डाली थी. उस जमाने में जब मंदिर को कोई लूटने आता था तो सबसे पहले मूर्तियों को बचाया जाता था. उसी दौरान जगन्ननाथ जी की मूर्तियों को उड़ीसा के पूरी ले जाया गया था. जिसके बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने ईब्राहिम बाराहज़ारी की यहां कब्र बनवाई थी. इसलिए आज भी शहर के इस हिस्से को बाराहज़ारी के नाम से जानते है.

रेवाड़ी कृष्ण के भाई बलराम जी की ससुराल भी है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रेवाड़ी श्री कृष्ण के भाई बलराम जी की ससुराल भी है, राजा रेवत की बेटी रेवा के नाम पर ही रेवाड़ी शहर का नाम रेवाड़ी पड़ा था. शहर का जगन्न द्वार जो आज के दौर में अस्तित्व में नहीं है. वो मंदिर आने का मुख्य रास्ता हुआ करता था. मंदिर के पुजारी टेकचंद गौड़ बताते है कि हर वर्ष शहर में निकलने वाली जगन्ननाथ यात्रा कभी नहीं रुकी.

उनके पास एक दस्तावेज़ है जिसमें वर्ष 1878 में अंगेजों के शासन के दौरान यात्रा की अनुमति मांगी गई थी, उन्होने कहा कि अंगेज़ भी इस यात्रा को नहीं रोक पाये और ना भारत में आपातकाल के दौरान यात्रा रुकी और ना ही कोरोना काल के दौरान यात्रा रोकी गई.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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