सवा बीघे में सवा सौ नींबू के पेड़ ने बदली चतुर्भुज की किस्मत, 15 साल पहले आगरा से पौधे लाकर की थी शुरुआत


मोहित शर्मा/करौली. गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा मांग रहने वाले खट्टे फल नींबू ने भले ही अपने महंगे दाम से आम आदमी को निचोड़ दिया हों. लेकिन किसानों के लिए इसी नींबू की बागबानी फायदेमंद साबित हो रही है. राजस्थान के करौली में दर्जनों किसान परंपरागत खेती को छोड़ खट्टे फल नींबू की बागवानी से सालाना लाखों में मुनाफा कमाकर मालामाल हो रहे हैं.

करौली के गंगापुर मोड़ के पास करीब 15 साल पहले आसपास के क्षेत्रों में नींबू की बागवानी देखकर किसान चतुर्भुज ने अपनी सवा बीघे जमीन में 20-25 नींबू के पौधों से खट्टे फल की खेती शुरू की थी. जिसके बाद आज यही किसान अपनी सवा बीघे जमीन में सवा सौ कागजी नींबू के पौधों से सालाना लाखों में मुनाफा कमा रहा है.

आगरा से 20-25 पौधे लाकर की थी शुरुआत
किसान चतुर्भुज शर्मा का कहना है कि पहले वह गेहूं, चना और सरसों की खेती किया करते थे. जिसके बाद में उन्होंने आसपास के क्षेत्रों में नींबू के बगीचे को देखकर अपना मन बदल कर कुछ नया करने की सोच से नींबू की खेती की शुरुआत आज से करीब 15 साल पहले की थी. किसान का कहना है कि सबसे पहले इस खेती की शुरुआत के लिए वह आगरा से 20-25 नींबू के पौधे लाकर और उनसे पौधे तैयार कर अपनी सवा बीघे जमीन में नींबू का बगीचा तैयार किया था और अब इसी नींबू की बागवानी से लाखों से ऊपर पैदावार हो रही है.

कम लागत में होती है अच्छी पैदावार
किसान चतुर्भुज बताते हैकि नींबू की खेती में कम पानी की आवश्यकता के साथ लागत भी कम लगती है. नींबू की खेती में अच्छी पैदावार होने के कारण आज हमारे बाग का कागजी नींबू दिल्ली तक जाता है. वे बताते हैकि नींबू की खेती दो बार फल देती है. जिसमें सबसे ज्यादा इस गर्मी के मौसम में तो उसके बाद में जब सर्दियों के मौसम में नींबू का अचार डलता है. तब भी यह नींबू की खेती फल देती है.

किसान चतुर्भुज शर्मा का परंपरागत खेती से जुड़े किसानों के लिए कहना है कि अगर परंपरागत खेती को छोड़ क्षेत्र के किसान नींबू की बागवानी शुरू करते हैं तो नींबू की खेती उनके लिए कम लागत में अच्छी पैदावार का जरिया है. उनका कहना है कि परंपरागत खेती के बजाए नींबू की खेती में मेहनत कम और पानी की कम आवश्यकता पड़ती है. गर्मी के मौसम में इसके लिए जरूर पानी की महीने में एक बार आवश्यकता रहती है. लेकिन सर्दी के मौसम में इसके लिए एक ही पानी भरपूर रहता है.

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Author: Jagran Times

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