वेस्ट लकड़ी से प्रोडक्ट बनाकर महिलाएं बनी आत्मनिर्भर, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत मिल रही ट्रेनिंग

निखिल त्यागी/सहारनपुर: स्वरोजगार के क्षेत्र में महिलाएं भी अब आगे बढ़कर काम कर रही है. सरकार की योजना के अनुसार महिलाये ग्रुप बनाकर निजी संस्थाओं में विभिन्न उत्पाद तैयार कर बाजार से मुनाफा कमा रही हैं. ओडीओपी योजना के अंतर्गत सहारनपुर की महिलाओं ने स्वरोजगार के माध्यम से जहां दूसरी महिलाओ के लिए रोजगार के रास्ते खोलें है, वहीं उन्हें अच्छा मुनाफा भी मिल रहा है.

सहारनपुर में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत सरकार द्वारा सहारनपुर जनपद को लकड़ी से बने उत्पादों के लिए चयनित किया गया है. योजना के अंतर्गत बेकार लकड़ी से खिलौने और घर का सामान आदि बनाने के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना सरकार की मंशा है. इसी के अंतर्गत सहारनपुर की सुधा सैनी सहित कई महिलाओं ने प्रशिक्षण लेकर बेकार लकड़ी से घर का सामान और बच्चो के खिलौने आदि तैयार कर रोजगार खड़ा कर दिया है. इस काम में महिलाओं को रेलवे प्रशासन की ओर से सहयोग मिल रहा है. महिलाएं रेलवे स्टेशन पर स्टॉल लगाकर खुद के द्वारा बनाए गए सामान की बिक्री कर रोजगार से मुनाफा कमा रही हैं.

लकड़ी से बने उत्पादों की हो रही मांग
सहारनपुर की सुधा सैनी ने बताया कि- महिलाओं के समूह द्वारा बेकार लकड़ी से बनाए गए उत्पादों के लिए उन्होंने रेलवे स्टेशन पर स्टॉल लगाई है. जिसमें बच्चों के खिलौने कार,ट्रैक्टर,बस,जीप,कुर्सी,मेज और घर के सामान जैसे चकला,बेलन,चिमटा आदि रसोई के सामना का स्टॉल लगाकर बेचा जा रहा है. उन्होंने बताया कि- इस काम में जिला कृषि विभाग और रेलवे प्रशासन द्वारा भरपूर सहयोग दिया जा रहा है. इस से महिलाओं को अच्छी आमदनी हो रही है. उन्होंने बताया कि हमारे द्वारा बेकार लकड़ी से बनाए गए उत्पादों को बहुत पसंद किया जा रहा है.

मिल रहा है अच्छा मुनाफा
सुधा सैनी ने बताया कि- सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर उन्होंने अपने लकड़ी से बने उत्पादों की स्टॉल लगाई है. स्टॉल पर ग्राहकों का काफी रुझान देखने को मिला और इससे हमारी प्रतिदिन की कमाई 10 से 12 हजार रुपए हो रही है. उन्होंने बताया कि इससे पहले हमने अपना स्टॉल विकास भवन पर लगाया था. जहां पर हमें प्रतिदिन 10 हजार रुपए की आमदनी हो रही थी. आगे सुधा सैनी ने बताया कि हमारे समूह ने नोएडा में का स्टॉल लगाया था, जहां पर हमारी प्रतिदिन की आमदनी 20 हजार रुपए से ऊपर हुई थी. आरंभ में हम 11 महिलाओं ने समूह में यह प्रशिक्षण लिया था. अब धीरे-धीरे हमारे समूह में महिलाओं की संख्या 20 हो गई है. उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ी महिलाएं अपने पति के साथ मिलकर बेकार लकड़ी से खिलौने आदि उत्पादक बनाकर अपनी आजीविका चला रही है. तथा आत्मनिर्भर बनकर अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन रही है.

रेलवे ने किया महिलाओ का सहयोग
कृषि विज्ञान केंद्र के जिला कृषि अधिकारी डॉ.आई के कुशवाहा ने बताया कि- सरकार की मंशा के अनुसार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बेकार लकड़ी से खिलौने व घर का सामान आदि बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है. वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा सहारनपुर जनपद को लकड़ी के उत्पाद बनाने के लिए चयनित किया गया है. इसी के अंतर्गत रेलवे स्टेशन पर समूह की महिलाओं द्वारा स्टॉल लगाकर खुद के द्वारा बनाए गए खिलौनों व सामान को बेचा जा रहा है. जिससे उन्हें अच्छी खासी आय अर्जित हो रही है. आई. के. कुशवाहा ने कहा कि- इस काम में रेलवे प्रशासन द्वारा भरपूर सहयोग दिया जा रहा है. सरकार के निर्देशानुसार हर स्टेशन पर अलग-अलग जिलों के हिसाब से चयनित उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं.

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Author: Jagran Times

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