
रवि पायक/भीलवाड़ा. मुस्लिम समुदाय के सबसे खास त्योहारों में से एक बकरा ईद आगामी 29 जून को पूरे भारत सहित भीलवाड़ा जिले भर में मनाई जाएगी. इसके लिए भीलवाड़ा शहर में बकरा मंडी लगने से अलग-अलग नस्लों के बकरे यहां पर बिकने के लिए तैयार हैं. भीलवाड़ा जिले में बाहर से आकर कई लोग बकरों को बेचते हैं. बकरा ईद पर बकरों की बढ़ती मांग से बकरा पालकों के वारे भी न्यारे हो रहे हैं.
आमतौर पर देखा जाए तो एक बकरा करीब 10 से 12 हजार में आ जाता है, लेकिन बकरा ईद त्यौहार पर इसकी कीमत इसके वजन और कद काठी के अनुरूप बढ़ जाती है. जिस पर बकरा पलकों की भी अच्छी कमाई हो जाती है. बकरा पालकों ने बताया कि एक बकरा-बकरी को तैयार करने के लिए लगभग 1 वर्ष लगता है.
खास बनावट और निशान वाले बकरों की कीमत लाखों में
मुस्लिम धर्म ग्रंथ के मुताबिक, बकरीद का त्योहार हर साल इस्लामिक कैलेंडर के अंतिम माह जु-अल-हिज्ज में मनाया जाता है. इसे ईद-उल-अजहा के नाम से भी जानते हैं. कहीं-कहीं इसे बकरा ईद भी कहते हैं. ईद-उल-अजहा या बकरीद का त्योहार कुर्बानी का संदेश देता है. जिसका अर्थ होता है- खुदा के बताये गए रास्ते पर चलना. इसको लेकर भीलवाड़ा शहर में बाजार सजने लगे हैं. जहां पर कुछ जगहों पर तो बकरे मिल रहे हैं. भीलवाड़ा शहर में बकरा मंडी में करीब 300 से अधिक दुकानें लगती हैं. जिसमें 12 हजार से लेकर 30 – 40 हजार रुपए तक के बकरे बिक रहे हैं. वहीं कुछ खास बनावट और निशान वाले बकरों की कीमत लाखों में जा रही हैं.
ईद तक होती है बकरे की खातिरदारी
भीलवाड़ा शहर के पशुपालन विभाग के निकट बकरा मंडी लगाने वाले व्यापारियों का कहना है कि आने वाली 29 जून को बकरा ईद मनाई जाएगी. इसको लेकर भीलवाड़ा शहर के इस इलाके में बकरा मंडी सजने लगी है. यहां पर भीलवाड़ा जिले भर से बकरा पालक बकरी बेचने के लिए आते हैं एक बकरे को तैयार करने में करीब 1 साल से अधिक का समय लगता है. दूसरी तरफ बकरा खरीदने के लिए आए आए ग्राहकों का कहना है कि हम ईद के मौके पर बकरा लेने के लिए आते हैं और हम ईद तक बकरे की अच्छे से खातिरदारी करते हैं और जब बकरा ईद आती है तो हम अल्लाह के लिए उसकी कुर्बानी करते हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 26, 2023, 16:31 IST





