
अनिल राठी/फरीदाबाद: बल्लभगढ़ में आखिरकार 166 साल बाद महान योद्धा राजा नाहर सिंह की प्रतिमा को लगाया जाएगा. 10 फुट ऊंची प्रतिमा अष्टधातु से विशेष तौर पर बनाई जा रही है, जिसको लेकर लगभग सभी तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं. भारत जाट समाज की तरफ से इस मूर्ति को राजा नाहर सिंह महल में लगाया जा रहा है.
कौन थे राजा नाहर सिंह?
जानकारी के अनुसार, दिल्ली से सटे हरियाणा के घनी आबादी वाले बल्लभगढ़ में सन 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम में क्रांति की मशाल जलाई थी. उस क्रांति में शहीद होने वाले अग्रणी क्रांतिकारियों में शामिल नामों में से एक वीर योद्धा और महान जाट राजा नाहर सिंह भी थे. उन्होंने कई बार अंग्रेजी हूकुमत का सीधे तौर पर मुकाबला किया और जीते जी अपनी रियासत को न सिर्फ पूरी तरह अंग्रेजों से सुरक्षित रखा था, बल्कि किसी भी अंग्रेज के अपने राज्य की सीमाओं में आने पर प्रतिबंध भी लगा रखा था.
धोखे से दी गई फांसी
दरअसल, राजा नाहर सिंह को ब्रिटिश सरकार ने सन 1857 में ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह करने के आरोप में धोखे से गिरफ्तार किया था. 9 जनवरी सन 1858 को लाल किले के सामने चांदनी चौक में फांसी पर लटका दिया गया. इस बात की भी भरपूर कोशिश की थी कि उनसे जुड़ी सभी प्रकार की निशानियों को भी नष्ट कर दिया जाए, ताकि उनकी प्रेरणा लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के लिए दूसरे क्रांतिकारी न पैदा हो सकें.
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FIRST PUBLISHED : June 26, 2023, 15:43 IST





