सिर्फ 20 रुपये में 3 कचौड़ी, लकड़ी के चूल्हे पर बनने से आता है गजब का स्वाद

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निखिल स्वामी/बीकानेर. आमतौर आपने गैस और भट्टी पर बनी कचौरी और समोसा खाए होंगे, लेकिन बीकानेर में देसी तरीके से यानी चूल्हे पर कचौरी और समोसा बनाया जाता है. इन कचौरी और समोसा का स्वाद चखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. शहर के फड़ बाजार में रोजाना लकड़ी और कोयला को जलाकर चूल्हे पर हजारों कचौड़ी और समोसे बनाए जाते हैं. बीकानेर के चोखूंटी रेलवे क्रॉसिंग फड़ बाजार में पिछले 40 सालों से देसी तरीके से कचौड़ी और समोसा बनाया जा रहा है.

दुकानदार ओमप्रकाश तंवर ने बताया कि पहले कचौड़ी और समोसा मिट्टी के तेल से स्टोव पर बनाते थे, लेकिन अब वो बंद हो गया. इस वजह से चूल्हा लगा लिया. वे बताते हैं कि गैस पर बनने वाली कचौरी और समोसा स्वाद नहीं लगता है. चूल्हे पर बनी कचौरी और समोसा ही स्वाद लगते हैं.

तीन हजार कचौरी और समोसे बिक जाते हैं रोजाना
तंवर बताते हैं कि एक बार में 200 से अधिक कचौड़ी और समोसा कढ़ाई में डाला जाता है. रोजाना यहां से तीन हजार कचौड़ी और समोसा बेचते हैं. तंवर ने बताया कि 20 रुपये की तीन कचौरी और समोसा देते हैं, ऐसे में 7 रुपए की एक कचौरी और समोसा देते है. सुबह 6 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक दुकान खुली रहती है. वे बताते है कि वे दुकान में उनके साथ उनका बेटा भी काम करता है.

इस तरह बनाते है समोसा और कचौरी
तंवर ने बताया कि समोसा बनाने में मैदा, आलू, मिर्च, अदरक, पौदिना, धाना, गर्म मसाला, नमक डालते है. वहीं कचौरी में मैदा, दाल, मिर्च, गर्म मसाला, लौंग, काली मिर्च, नमक डाले जाते है.

Tags: Food 18, Local18

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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