
नरेश पारीक / चूरू. किस्से और किवदंतियों से भरे थार का द्वार कहे जाने वाला चूरू अपने गर्वीले इतिहास के लिए जाना जाता है. यहां घटी हर एक सच्ची घटना का साक्षी ये शहर विश्व का इकलौता ऐसा शहर है. जहां शत्रु सेना पर गोला बारूद खत्म होने पर गढ़ से चांदी के गोले दागे गए थे. शहर में वर्षो पहले घटी ये ऐतिहासिक घटना आज भी यहां के वाशिंदों के दिलो-दिमाग में है.
इसी शहर में वर्षो पहले यहां के एक सेठ ने अपनी और शहर की इज्जत बचाने के लिए अपना सब कुछ दाव पर लगा, एक ऐसी मिसाल कायम की जिसकी चर्चा आज भी होती है. शहर के राजकुमार शर्मा बताते हैं चूरू के एक बनिए (सेठ) ने सीकर के पास अपनी बेटी का रिश्ता तय किया और शादी की तारीख तय होने के बाद वर पक्ष द्वारा बार-बार वधु पक्ष से शादी में बारातियो की संख्या के बारे में पूछा गया तो गुस्साए दुल्हन के पिता ने कहा आप जितने बाराती लाना चाहते हो लाओ. जिसके बाद वर पक्ष अपने पूरे गांव को और बीच रास्ते मे आने वाले सभी गांवों के लोगो को बारात में शामिल करते गए और आगे बढ़ते गए.
बारात में आए गांवों के गांव, लोगों ने नहीं आने दी खाने में कमी
राजकुमार शर्मा ने बताया कि जब दुल्हन के पिता को पता चला कि बारात में कई गांव आ रहे हैं. वह घबरा गए और चिंतित हुए की सीमित व्यवस्था में इतने गांवो के लोग बारात में आ रहे हैं. कैसे सभी की खाने-पीने की व्यवस्था होगी. जिसके बाद दुल्हन के पिता सेठ जी ने शहरवासियों से अपील की और कहा वह अपना सारा धन लगा देंगे. लेकिन, इन सब बारातियो की जैसे-तैसे खाने की व्यवस्था की जाए. इसके बाद पूरा चूरू बारात के स्वागत के लिए उमड़ पड़ा. साथ ही पूरे शहर और आस-पास के गांवों और शहरों से अनाज, तेल, दूध, घी लाया गया और सेठ की इज्जत के साथ शहर की इज्जत को कायम रखा गया.








