थानेसर में है दानवीर कर्ण का टीला, कनिंघम के आदेश पर हुआ था उत्खनन, जानिए इसका रहस्य

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अशोक यादव/कुरूक्षेत्र. महाभारत में हम सभी ने दानवीर कर्ण के बारे में खूब सुना है. कहानियों में उनके किरदार का वर्णन अति दयालु औऱ महान योद्धा के रुप में किया गया है. कर्ण जैसा दानवीर पूरे इतिहास में नहीं हुआ है. इसलिए आज पूरा विश्व उन्हें दानवीर कर्ण के नाम से जानता है.लेकिन शायद आप ये नहीं जानते होंगे कि धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में एक टीला है जो कि दानवीर कर्ण के नाम से जाना जाता है. वर्षों पहले ये टीला कुरुक्षेत्र में खुदाई के दौरान मिला था.खुदाई के दौरान कई औऱ पौराणिक वस्तुएं भी प्राप्त हुई थी.

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह टीला कभी राजा कर्ण का किला होता था. इस टीले का सर्वेक्षण सर्वप्रथम कनिंघम ने तथा उत्खनन डी.बी. स्पूनर ने किया था. टीले से उत्खनन से प्राप्त अवशेषों को 400 से 100 ई. पू. तक तथा 100 ई.पू. से 300 ई. तक के दो कालों में विभाजित किया गया है. अवशेषों में धूसर चित्रित मृदभाण्ड, लाल चमकीले मृदभाण्ड तथा काली पलिश वाले मृदभाण्ड प्राप्त हुए हैं. यहां से प्राप्त वस्तुओं में पत्थर के सिल और मूसल, पत्थर के मनके, पशुओं की मूर्तियां, ब्राह्मीलेख से युक्त मोहरें आदि विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इस टीले से मध्यकालीन बस्तियों के भी अवशेष मिले हैं.

कवच और कुंडल दान कर दिया था दान
कर्ण का टीला कुरुक्षेत्र से पांच किलोमीटर की दूरी पर मिर्जापुर गांव में स्थित है.इसका संबंध दानवीर कर्ण से है, जो पांडवों के बड़े भाई थे. ये कुंती और सूर्य के अंश से कवच कुंडल धारण कर उत्पन्न हुए थे. दानवीर कर्ण सूर्य देव के अनन्य उपासक थे. इनकी माता कुंती द्वारा लोक नंदा के भय से जब इन्हें नदी में प्रवाहित कर दिया गया तो वे अधिरथ और राधा के पास पहुंचे और उन्होंने कर्ण को अपना पुत्र बनाया. दुर्योधन के द्वारा रंगभूमी में अंगदेश के राज्यपद पर इनका अभिषेक किया गया था. अपने प्राणों को संकट में डालकर भी उन्होंने ब्राह्मण वेशधारी इंद्र को कवच और कुंडल दान में दिए थे.

अर्जुन ने किया था धोखे से वध
महाभारत युद्ध में कौरव पक्ष के प्रधान सेनापति द्रोणाचार्य के वध के बाद उनको इस पद पर नियुक्त किया गया था. उन्होंने सेनापति के पद का निर्वाह करते हुए पांडव के पराक्रमी योद्धा अर्जुन से रथ युद्ध किया. युद्ध के दौरान कर्ण के रथ का पहिया जमीन में धंस गया था. जब वो उसे निकालने का प्रयास कर रहे थे तभी श्रीकृष्ण के संकेत पर अर्जुन ने उनका वध कर दिया था. ऐसे दानवीर और महापराक्रमी कर्ण का टीला कुरुक्षेत्र में है.

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FIRST PUBLISHED : June 10, 2023, 14:01 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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