
रिपोर्ट: अमित शर्मा
मुरैना. मुरैना जिला अब तक नकल के मामले में बदनाम था, लेकिन अब यहां व्यापम शिक्षक वर्ग 3 की भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी सामने आई है. प्रदेश में दिव्यांग कोटे के 755 पदों में से केवल मुरैना जिले के ही 450 कैंडिडेट चुने गए. अब आरोप लग रहा है कि कई शिक्षकों का चयन फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के आधार पर किया गया है. शिकायतकर्ता ने पांच ऐसे दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण पत्र शासन को दिए हैं. जिनका जिला अस्पताल में कोई रिकॉर्ड तक नहीं है. फिलहाल मामले की जांच की जा रही है.
संविदा शिक्षक वर्ग 3 की भर्ती परीक्षा में दिव्यांग कोटे से शिक्षकों के चयन में आयुक्त निशक्तजन कल्याण संदीप रजक ने बड़ी गड़बड़ी को पकड़ा है. प्रदेश में दिव्यांगों के 755 पदों में से अकेले मुरैना जिले के ही 450 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है. रजक ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में दोनों आयुक्तों को चुने गए परीक्षार्थियों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. भोपाल में अधिकारियों को दिव्यांग शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़े की शिकायत मिली थी.
दिव्यांग शिक्षकों में से मुरैना के 70% से ज्यादा
मध्यप्रदेश में संविदा शिक्षक वर्ग 3 में जितने दिव्यांग पदस्थ हुए हैं उनमें से 70% से भी ज्यादा अकेले मुरैना से भर्ती हुए हैं. शिकायत करने वाले ने पांच ऐसे दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण पत्र शासन को दिए हैं जिनका जिला अस्पताल में कोई रिकॉर्ड नहीं है. मुरैना कलेक्टर ने अपने जिले का रिकॉर्ड चेक करने के अलावा ग्वालियर, भिंड और श्योपुर जिले के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र भेजकर जांच करने के लिए कहा है. साथ ही अधिकारियों से रिकॉर्ड मांगा है कि शिक्षक भर्ती पर परीक्षा में शामिल हुए कितने लोगों के लिए दिव्यांगता मेडिकल सर्टिफिकेट बनाए गए हैं.
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी मिलने का आरोप
दिव्यांग संघ के प्रदेश प्रभारी हेमंत कुशवाहा ने बताया कि संविदा शिक्षक वर्ग 3 में 1087 दिव्यांगों की वैकेंसी थी. इनमें से दिव्यांग कोटा से 755 लोग भर्ती हुए. इनमें 450 लोग अकेले मुरैना के रहने वाले हैं. उनका आरोप है कि यह सब गड़बड़ी राजनीतिक हस्तक्षेप की वजह से हुई है. ऐसे में वास्तव में जो लोग दिव्यांग है वह भर्ती से वंचित रह रहे हैं और फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र बनवाने वाले नौकरी लग रहे हैं. उनका आरोप है कि मुरैना में कुछ डॉक्टर 20 से 25 हजार रुपए में फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवा देते हैं. इनमें से 5 सर्टिफिकेट मेरे पास हैं, जिनका जिला अस्पताल में कोई रिकॉर्ड नहीं है. इसके अलावा दो सर्टिफिकेट ऐसे हैं कि जिस आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर के उस पर सिग्नेचर हैं वह अपने सील साइन होने से इंकार कर रही हैं.
मामले की जांच जारी
जिन्हें दिव्यांग प्रमाणपत्रों के बलबूते शिक्षकों को जिले में पदस्थ किया गया उनके प्रमाण पत्रों का वेरिफिकेशन तक नहीं हुआ है. दिव्यांग संघ के प्रदेश प्रभारी समेत अन्य लोगों का आरोप है कि 250 से ज्यादा फर्जी प्रमाण पत्र बनाए गए हैं जिनका सत्यापन होना चाहिए. मामले में मुरैना कलेक्टर इच्छित गढ़पाले का कहना है कि शिकायत मिली है. इसकी जांच के लिए सिविल सर्जन की अध्यक्षता में एक टीम बनाई गई है. साथ ही सीएमएचओ की कमेटी बनाई गई है वह भी जांच कर रही है. जिला शिक्षा अधिकारी एके पाठक का कहना है कि मध्यप्रदेश में कुल 257 ऐसे शिक्षक नियुक्त हुए हैं जिनका दिव्यांग प्रमाण पत्र सिविल सर्जन मुरैना से जारी किया गया है. पुलिस समेत लोक शिक्षण संचनालय भी मामले की जांच कर रहा है.
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FIRST PUBLISHED : June 09, 2023, 13:56 IST








