बच्चों को नहाते वक्त टब या शावर से नहाना बहुत पसंद होता है. मां-बाप के द्वारा डांटने पर भी वो पानी से बाहर नहीं निकलते. पर जब वो काफी देर बाद पानी से निकलते हैं और उनकी चमड़ी सिकुड़ (Why skin wrinkle in water) जाती है तो वो डर भी जाते हैं. छोटे में ये डर लगभग हर किसी को रहा होगा. पर बड़े होते-होते लोग समझ जाते हैं कि ये महज एक वैज्ञानिक क्रिया है जो हमारे शरीर के साथ होती है जब हम पानी में जाते हैं. पर शायद ही लोग जानते होंगे कि इस क्रिया के पीछे क्या राज है?
विज्ञान बड़ी ही कमाल की चीज है, उसके पास आपकी सारी समस्याओं का हल है. विज्ञान के जरिए आप जीवन के कई सवालों के जवाब तलाश सकते हैं. विज्ञान के पास भी इस सवाल का जवाब है कि पानी में डालने के बाद, हाथ-पैर की स्किन क्यों सिकुड़ (Why hands feet shrink in water) जाती है. उससे निकालने के कुछ देर बाद वो नॉर्मल भी हो जाती है. ये एक नेचुरल प्रोसेस है जिसका शरीर पर कभी कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है.
चमड़ी का सिकुड़ना ऑस्मोसिस के कारण होता है. (प्रतीकात्मक फोटो: Canva)
क्यों सिकुड़ने लगती है स्किन?
हमारी चमड़ी के ऊपरी हिस्से पर सीबम नाम का ऑयल होता है जो स्किन को गीला करता है और ल्यूब्रिकेट करता है. वो स्किन की रक्षा भी करता है. जब हम नहाते वक्त पानी अपनी स्किन पर डालते हैं तो इसी ऑयल की वजह से पानी नीचे गिर जाता है और स्किन पर जमा नहीं हो पाता. पर ज्यादा वक्त तक पानी में रहने की वजह से ये सीबम ऑयल खत्म हो जाता है और पानी स्किन के अंदर प्रवेश कर जाता है. इस प्रक्रिया को ऑस्मोसिस कहते हैं. स्किन के अंदर पानी घुस जाने से ही ये सिकुड़ने लगती है.
हाथ-पैर पर ही क्यों ज्यादा दिखती है प्रक्रिया?
जब व्यक्ति पानी के बाहर निकलता है तो स्किन के अंदर पानी के अणु अपने आप सूखने लगते हैं और स्किन फिर से नॉर्मल हो जाती है. इस तरह पानी के कारण स्किन के सिकुड़ने को एक्वाटिक रिंकल्स (aquatic wrinkles) कहते हैं. हाथ और पैर में केराटिन ज्यादा होता है जो एक प्रकार का प्रोटीन होता है. यही प्रोटीन पानी को सोखने में मदद करता है. हाथ-पैर में केराटिन की मात्रा ज्यादा होती है, इस वजह से स्किन के सिकुड़ने की प्रक्रिया इन्हीं दो अंगों पर अधिक नजर आती है.
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FIRST PUBLISHED : June 09, 2023, 08:53 IST








