भारत में यहां है स्वर्ग का रास्ता, महाभारत में भी है उल्लेख, जानिए स्वर्ग की सीढ़ी की कहानी …

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सोनिया मिश्रा/ चमोली.उत्तराखंड में वैसे तो कई जगह हैं, जहां आप घूम सकते हैं. सुकून के पल अपने दोस्तों, परिवार के साथ बिता सकते हैं. लेकिन आपने क्या कभी सोचा है कि दोस्तों के साथ स्वर्ग की सीढ़ियों से पहाड़ के सुंदर नजारों को निहारना कैसा होगा. राज्य के चमोली जिले में एक ऐसी ही जगह है, जहां कथित तौर पर स्वर्ग जाने का रास्ता है. इसे स्वर्ग जाने की सीढ़ी भी कहा जाता है. इसके पीछे मान्यता है कि पांडव भी इसी रास्ते से स्वर्ग गए थे. यह स्वर्गारोहिणी है माणा गांव (Mana Village Uttarakhand) में, जिसे अब भारत का प्रथम गांव कहा जाता है.

क्या है स्वर्ग की सीढ़ी की कहानी?

महाभारत के 18 अध्यायों में 17वें अध्याय महा प्राथनिका पर्व में लिखा है कि कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद पांचों पांडवों ने अपनी पत्नी द्रौपदी समेत संन्यास ले लिया था और महल और राज्य को छोड़ तपस्या के लिए निकल पड़े थे. तपस्या का यह सफर उन्हें हिमालय के पहाड़ों के बीच ले आया. स्वर्ग की ओर अपने इस आखिरी सफर पर बढ़ते हुए हर किसी को एक-एककर अपने कर्मों का फल मिलने लगा. सबसे पहले द्रौपदी की मृत्यु हुई. सहदेव इस यात्रा को पूरा न कर सके. इसके बाद नकुल और अर्जुन की मृत्यु हुई और फिर भीम. एक-एककर युधिष्ठिर को छोड़कर सभी पांडव रास्ते में ही अपने प्राणों को छोड़ते गए. यह माना जाता है कि एक कुत्ते ने युधिष्ठिर के साथ स्वर्ग की सीढ़ी यहीं से चढ़ी थीं. महाभारत के इस अंश में यह भी बताया जाता है कि बिना मानवीय शरीर छोड़े यहीं से स्वर्ग का रास्ता है, जहां से आप स्वर्ग जा सकते हैं. हालांकि इसको लेकर कई तरह के मत भी हैं.

ट्रेकिंग के लिए मशहूर है ‘स्वर्ग की सीढ़ी’

स्वर्गारोहिणी जाने के लिए आपको शारीरिक रूप से मजबूत होना जरूरी है. यहां पहुंचने के लिए आपको जोशीमठ से बद्रीनाथ तक टैक्सी से आना होगा. फिर बद्रीनाथ से लक्ष्मीवन, लक्ष्मीवन से चक्रतीर्थ, चक्रतीर्थ से सतोपंथ ताल, सतोपंथ ताल से चंद्रकुंड ट्रेक, चंद्रकुंड से सूर्यकुंड तक ट्रेक, सूर्यकुंड से स्वर्गारोहिणी बेस कैंप (17987 फीट) तक पहुंच जाओगे. यह रास्ताट्रेकिंग के लिए मशहूर है और ट्रेकर्स को यह जगह खूब भाती है.

कैसे पहुंचे?

बाय रोड- माणा गांव तक जाने के लिए सड़क सुविधा उपलब्ध है.

बाय एयर- निकटतम गौचर हेलीपैड है. इसके आगे का सफर आपको सड़क मार्ग से होते हुए ही तय करना होगा.

बाय ट्रेन- निकटतम ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है. यहां से आप कैब बुक करके आसानी से माणा गांव पहुंच सकते हैं.

Tags: Hindi news, Religion 18, Uttarakhand news

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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