
कासिम ख़ान/नूंह.1947 में देश का बंटवारा हुआ, वह काली अंधेरी रात थी. मेव कौम स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीजी के साथ रही.फिरोज़पुर झिरका में इस दौरान 3 लोग शहीद हुए और उस समय के बड़े नेता अब्दुल हाई को ढ़ाई साल जेल में रहना पड़ा. अलवर और भरतपुर के राजाओं ने उस समय कत्लेआम किया. मेवात के अलावा उन्होंने गुड़गांव पर भी हमले किए. उस समय हालात काफी ख़तरनाक थे. साम्प्रदायिक लोगों ने नारा दिया था कि या तो पाकिस्तान चले जाओ या कब्रिस्तान चले जाओ.
इतिहासकार सिद्दीक अहमद ने बताया कि अलवर और भरतपुर रियासत से लाखों की लोग घासेड़ा आ गए.काफिलों में उन्हें पाकिस्तान भेजा जा रहा था, लेकिन यहां के लोगों ने पाकिस्तान जाने से मना कर दिया. उस समय ख़ान मोहम्मद बहादुर ने लोगों को पाकिस्तान जाने के लिए उकसाया था.लेकिन लोगों ने उसके बावजूद भी अपने वतन में ही रहने की बात कही. उस दौरान मेवात से कुछ नेता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से दिल्ली जाकर मिले.
मेव कौम है हिंदुस्तान की रीढ़ की हड्डी
19 दिसंबर 1947 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ग्राम घासेड़ा में अपने साथी नेताओं रणवीर सिंह हुड्डा, अब्दुल हई, सुभद्रा कुमारी चौहान, चौधरी यासीन खान के साथ आए और उन्होंने भाषण के दौरान कहा कि मेव कौम हिंदुस्तान की रीढ़ की हड्डी है. इनको घरों से बाहर ना निकाला जाए. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री गोपीचंद भार्गव और देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को मेव कौम के जानमाल की सुरक्षा की गारंटी लेनी चाहिए. कुल मिलाकर उसी दिन से मेवात के लोग ख़ासकर मेव कौम वतन परस्ती की मिसाल देती रही है. उसी दिन से घासेड़ा गांव को गांधी ग्राम घासेड़ा के नाम से जाना जाता है.
घासेड़ा गांव से है गांधी जी का अटूट रिश्ता
भूतपूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने घासेड़ा गांव को आदर्श गांव बनाने के लिए 17 करोड़ रुपए की राशि दी थी. इसके अलावा भी गांधी जी की यादों के साथ जुड़े होने की वजह से प्रदेश की सभी दलों की सरकार इस गांव के विकास पर खास ध्यान देती रही हैं. कुल मिलाकर घासेड़ा गांव से गांधी जी का अटूट रिश्ता है. स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र नूरुद्दीन नूर एडवोकेट एवं जिले के जाने-माने समाजसेवी रमजान चौधरी एडवोकेट ने भी कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और मेवात के लोगों का आपस में गहरा नाता है. मेव कौम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दिए हुए वचन के मुताबिक आज भी वतन परस्ती की मिसाल पेश कर रही है.
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FIRST PUBLISHED : June 07, 2023, 14:42 IST








