
परमजीत कुमार/देवघर. आषाढ़ महीने के चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है. इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा की जाती है. वहीं पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी पड़ती है. कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है. बैद्यनाथधाम के ज्योतिष आचार्य के अनुसार इस साल संकष्टी चतुर्थी बुधवार 7 जून को मनाई जाएगी.
हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का अपना अलग ही महत्त्व है. इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. जिससे सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. विशेषकर जो कर्ज में डूबे हुए व्यक्ति हैं, उन्हें इस दिन व्रत रखकर गणेश जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए. सारे कर्जों से मुक्ति मिलेगी.
बैद्यनाथ धाम के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुदगल ने न्यूज़18 लोकल से कहा कि संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखकर गणेश भगवान की पूजा की जाती है और शाम में चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. इसके साथ ही इस दिन गणेश यंत्र बनाकर उसमें ध्रुवा चढ़ाएं. ऐसा करने से सारे कष्ट मिट जाएंगे. संकष्टी चतुर्थी का नाम इसलिए संकष्टी चतुर्थी पड़ा, क्योंकि इस दिन व्रत रखकर गणेश भगवान की सच्चे मन से पूजा की जाए तो सारे संकटों को भगवान के द्वारा हर लिया जाता है.
हिंदू धर्म में किसी भी पूजा-पाठ के लिए शुभ मुहूर्त देखा जाता है. संकष्टी चतुर्थी तिथि 6 जून को रात 10 बजे से शुरू हो रही है और इसका समापन 7 जून को रात 11 बजे होगा. इसलिए उदया तिथि के अनुसार 7 जून को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी. संध्या 7 बजे के बाद से पूजा का शुभ मुहूर्त है. रात्रि रात 10 बजकर 18 मिनट मे चंद्रमा को अर्घ्य दें.
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FIRST PUBLISHED : June 06, 2023, 14:04 IST








