
सौरभ राठौर, नई दिल्ली. बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर
बन रहे निर्माणाधीन पुल गिरने के मामले में अब राजनीति भी तेज हो गई है. सत्ताधानी दल जनता दल यूनाइटेड के एमएलए ने ही सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विधायक डॉक्टर संजीव कुमार का मानना है कि पुल के गिरने के पीछे सरकारी कर्मचारियों और निर्माण कर रही कंपनी के बीच मिलीभगत हो सकती है. सीएनएन-न्यूज18 को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि अधिकारियों और कंपनी के बीच किसी प्रकार के आपसी मेलजोल से इंकार नहीं किया जा सकता.
गंगा नदी पर अगुवानी-सुल्तानगंज को जोड़ने के लिए नीतीश कुमार की सरकार 1,710.77 की लागत वाला यह पुल बनाव रही है. मुख्यमंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान रविवार शाम को चार लेन के इस ब्रिज का 190 मीटर हिस्सा अचानक भरभरा कर गिर गया. पिछले साल भी इसी ब्रिज का सुल्तानगंज के पास का 100 मीटर हिस्सा अचानक नदी में गिर गया था. मौजूदा घटना के दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. पुल शाम को गिरा. लिहाजा लेबर दिन का काम करने के बाद लौट चुकी थी.
डॉ संजीव ने कहा, “मैंने बीते साल भी विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था. सड़क निर्माण विभाग के अतिरिक्त सचिव प्रत्यय अमृत को लगता है कि वो काफी स्मार्ट हैं लेकिन यह उनकी गलतफहमी है. निर्माण कर ही कंपनी और अधिकारियों के बीच मिलीभगत से इंकार नहीं कर सकते. अगर अमृत की देखरेख में ही जांच की जाती है तो यह ठीक नहीं होगा. हमें न्यायिक जांच चाहिए.”
गंगा नदी पर यह पुल हरियाणा की एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी करवा रही है. साल 2014 में नीतीश कुमार ने ही ब्रिज के निर्माण की नींव रखी थी. इस पुल के निर्माण के बाद नॉर्थ और साउथ बिहार के बीच दूरी कम हो जाएगी. इस घटना के सामने आने के बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा, “पुल गिरने के सही कारणों का पता लगाने के लिए सभी तकनीकी पहलुओं की जांच की जाएगी. दूसरी बार पुल का हिस्सा गिरा है. जब पहली बार यह गिरा था तो आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी रुड़की और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से इसकी जांच कराई गई थी. हमें ब्रिज के डिजाइन पर संदेह था. जिसके बाद इसे गिराकर दोबारा बनाने का निर्णय लिया गया था.”
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FIRST PUBLISHED : June 05, 2023, 16:10 IST








