
अभिषेक जायसवाल/वाराणसी. सनातन धर्म में पूजा-मंत्र का अपना विशेष महत्त्व है. इन्हीं पूजा-अनुष्ठानों में एक है बगलामुखी, जिसे ब्रह्मास्त्र के तौर पर प्रयोग किया जाता हैं. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक यह पूजा शत्रुओं पर विजय के लिए की जाती है. त्रेतायुग में इसी विद्या के कारण अंगद ने रावण की सभा में अपना पैर जमा दिया था, जिसे कोई भी हिला नहीं सका. इसके अलावा अर्जुन ने महाभारत युद्ध में विजय के लिए यही पूजा की थी. काशी के विद्वान और ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि बगलामुखी देवी तंत्र विद्या की देवी हैं. 10 ब्रह्म महाविद्याओं में यह पूजा भी शामिल है. शत्रुओं पर विजय के लिए यह पूजा की जाती है. यह एक गुप्त साधना है जिसे गुपचुप तरीके से करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय के मुताबिक, इस गुप्त साधना में 5 दिन का वक्त लगता है. पांच दिन तक 5 से 6 घंटे यह पूजा की जाती है. वर्तमान में इस पूजा का इस्तेमाल शत्रुओं पर विजय, जमीन विवाद, राजनीतिक जीत और जेल से बचने के लिए किया जाता है. मध्य प्रदेश के दतिया में बगलामुखी देवी का शक्ति पीठ है, जहां इस अनुष्ठान को किया जाता है. इसके अलावा आदिशक्ति मां दुर्गा के मंदिर में भी इस अनुष्ठान को गुपचुप तरीके से किया जाता है.
बगलामुखी पूजा में पीले रंग का प्रयोग जरूर करना चाहिए. पीले वस्त्र पहनकर ही इस पूजा को करना चाहिए. इसके अलावा इस पूजा में पीले पुष्प और हल्दी के गांठ कर मंत्र जाप के साथ चढ़ाना चाहिए. इस पूजा के प्रयोग से सभी तरह की नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है. इसके अलावा इस पूजा से मनचाहा वर भी मिलता है.
धार्मिक कथाओं के अनुसार सबसे पहले भगवान विष्णु ने यह पूजा की थी. वहीं कुछ कथाओं में इस बात का भी जिक्र है कि भगवान ब्रह्मा ने सबसे पहले यह पूजा की थी.
(नोट : यह खबर ज्योतिषशास्त्र और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. News18 इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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FIRST PUBLISHED : June 05, 2023, 14:29 IST








