
हाइलाइट्स
नेक्रोफीलिया को एक अपराध है लेकिन भारत में इसे लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं हैं.
इस अधिनियम को कई देशों में अत्यधिक वर्जित, निंदनीय और अपराध माना जाता है.
भारतीय दंड संहिता में मौजूद प्रावधानों के साथ ही इन मामलों से निपटा जाता है.
नई दिल्ली: हाल ही में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक सुनवाई के दौरान फैसला सुनाते हुए कहा था कि महिला के मृत शरीर के साथ यौन उत्पीड़न का कार्य भारतीय दंड संहिता में परिभाषित बलात्कार या अप्राकृतिक यौन अपराधों के तहत नहीं आता है. इस वजह से एक शख्स को जिस पर 21 वर्षीय एक युवती की हत्या करने के बाद शव के साथ बलात्कार करने के आरोप में जिला न्यायालय ने सजा सुनाई थी, उस मामले में बलात्कार के आरोप से मुक्त कर दिया है. हालांकि अदालत ने निचली अदालत के हत्या की सजा के फैसले को बरकरार रखा है.
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश बी. वीरप्पा और व्येंकटेश नाइक की पीठ ने केंद्र सरकार से सिफारिश की है कि वह नेक्रोफीलिया को बतौर अपराध स्पष्ट रूप से वर्गीकृत करने के लिए कानून में संशोधन करे.
कर्नाटक उच्च न्यायालय के इस फैसले के साथ यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर यह नेक्रोफीलिया क्या है, और क्यों इसे अपराध मानने की सिफारिश की जा रही है. आइए समझते हैं …
क्या होता है नेक्रोफीलिया?
नेक्रोफीलिया एक तरह की अजीब विकृति के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिसमें किसी शव की तरफ यौनाकर्षण के बारे में बताया जाता है. इसमें किसी व्यक्ति की शव के साथ यौन संबंध स्थापित करने की तीव्र इच्छा को समझाया जाता है. इस अधिनियम को कई देशों में अत्यधिक वर्जित, नैतिक रूप से निंदनीय और अपराध माना जाता है.
नेक्रोफीलिया के शाब्दिक अर्थ की बात करें तो यह एक ग्रीक शब्द है जिसमें ‘नेक्रो’ का मतलब मृत या शव और ‘फीलिया’ का मतलब प्यार या आकर्षण होता है. इस तरह इन दोनों शब्दों के मिलाने से यह अर्थ बनता है कि किसी शव या मृत शरीर के प्रति प्यार या आकर्षण. साधारण भाषा में कहें तो लीगल सर्विस इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक नेक्रोफेलिक वह होते हैं जो सब कुछ जानते और समझते हुए, अपनी मर्जी से किसी मृत शरीर के साथ यौन कृत्य में शामिल होता है.
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नेक्रोफीलिया को अपराध मानने के बारे में कर्नाटक हाईकोर्ट ने क्या कहा
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसा पाया गया है कि सरकारी और निजी अस्पतालों के मुर्दाघरों में शव की देखरेख करने वाले मृत शरीर के साथ यौन संसर्ग करते हैं. जिसे देखते हुए अदालत केंद्र सरकार से यह सिफारिश करती है कि भारतीय दंड संहिता में संशोधन किया जाना चाहिए. अदालत का सुझाव है कि या तो नेक्रोफीलिया को अप्राकृतिक यौन अपराध के रूप में दंड संहिता में शामिल किया जाए या फिर नेक्रोफीलिया को अपराध मानते हुए एक नया प्रावधान पेश किया जाए.
अदालत ने दूसरे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड,और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में नेक्रोफीलिया को एक अपराध मानकर इस पर अलग से कानून बनाया गया है. जबकि भारत में दंड संहिता के तहत इस पर किसी तरह का कोई अलग से कानून नहीं बनाया गया है. अदालत ने मृतक की गरिमा की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों की जरूरत पर जोर दिया.
मुर्दाघरों में निगरानी
वहीं दूसरी तरफ, पीठ ने राज्य सरकारों को मुर्दाघरों में मृत शरीर खासकर महिलाओं के मृत शरीर के संरक्षण और सुरक्षा के संबंध में निर्देश जारी किए हैं. खंडपीठ ने राज्य सरकारों को 6 महीनों के अंदर अस्पतालों के मुर्दाघरों में सीसीटीवी कैमरा लगाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. यह उपाय मृत शरीर के खिलाफ हो रहे अपराध को रोकने में अतिरिक्त कदम होगा, इसके साथ ही मृत शरीर के उचित संरक्षण के लिए भी कदम उठाए जाने की बात कही है ताकि मृत शरीर की गरिमा बनी रहे.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक मुर्दाघरों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी शवों को सावधानी से संभालने और उनके प्रति संवेदनशील बनाया जाना चाहिए. रिपोर्ट में बताया गया है कि निजता को बरकरार रखने के लिए पोस्टमार्टम कक्ष को इस तरह से तैयार किया जाना चाहिए कि आम जनता उसे देखने में सक्षम नहीं हो. इसके अलावा खंडपीठ ने शवों के उचित प्रंबधन के लिए जिला अस्पतालों को भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक के दिशानिर्देशों के मुताबिक मुर्दाघरों को बुनियादी ढांचा प्रदान करने की अहमियत पर जोर दिया.
नेक्रोफीलिया के मामलों से निपटने के लिए भारत में कौन से कानूनी प्रावधान
वर्तमान में भारत में नेक्रोफीलिया को एक अपराध माना जाता है लेकिन लीगल सर्विस इंडिया के मुताबिक इसे लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं हैं. इसके बजाए भारतीय दंड संहिता में मौजूद प्रावधानों के साथ ही इन मामलों से निपटा जाता है. भारतीय दंड संहिता की दो धाराओं के तहत मुख्य तौर पर नेक्रोफीलिया के मामलों की सुनवाई होती है, धारा 297 और 377. हालांकि दोनों में से कोई सी भी धारा साफ तौर पर नेक्रोफीलिक प्रवृत्तियों के बारे में बात नहीं करती है.
धारा 297 श्मशान या कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध रूप से घुसपैठ से संबंधित- अगर कोई शख्स किसी की भावनाओं को आहत करने के मकसद से, किसी धर्म का अनादर करने के इरादे से, यह जानते हुए कि उसके उठाए गए कदम से उस स्थान से जुड़े लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचेगी, श्मशान या कब्रिस्तान भूमि में घुसपैठ करता है, तो इसे अपराध माना जाता है. यह धारा नेक्रोफीलिया के मामले में तभी लागू की जा सकती है जब घुसपैठ का कार्य किया गया हो.
धारा 377 अप्राकृतिक अपराधों के संबंध में – इस धारा के तहत किसी भी महिला, पुरुष या जानवर के साथ आप्राकृतिक रूप से स्वैच्छिक रूप से संसर्ग करने को अपराध माना जाता है. कई बार अपराध की असाधारण प्रकृति में दर्शाने के लिए बलात्कार और हत्या से जुड़े प्रावधानों का भी सहारा लिया जाता है, हालांकि यह ध्यान देने वाली बात है कि यह प्रावधान किसी नेक्रोफीलिक गतिविधि या किसी के इसमें शामिल होने पर आरोप तय करने या मुकदमा चलाने के लिए अकेले काफी नहीं होते हैं.
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Tags: Criminal Laws, High court, IPC
FIRST PUBLISHED : June 05, 2023, 10:21 IST








