
जुगल कलाल/ डूंगरपुर. जब भी जहन में डूंगरपुर का नाम आता है तो दूर-दूर तक फैली हैं पहाड़ियां. इनकी हरियाली, खेत-खलिहान, सीधे-सरल यहां के आदिवासी लोगों जहन में आते है. डूंगरपुर आकार आप एक ऐसी जगह देखते है जो कि आधुनिक जीवन में अब दुर्लभ हो गई है. आपको यहां प्रदेश का सबसे साफ़ शहर देखने मिलेगा. तो दूसरी ओर आदिवासियो की अनोखी परंपरा भी देखने मिलेगी. यहां आपको 700 साल पुराने महल और उस समय की अद्भुत कलाकारी भी देखने मिलेगी. चलिए हम आपको आज डूंगरपुर रोचक इतिहास के बारे में बताते है.
दक्षिणी राजस्थान में बसे डूंगरपुर को पहाड़ियों का शहर कहा जाता है. यहां भीलों की संख्या काफ़ी है. यहां बसा है भील आदिवासियों का सुंदर संसार, जिन्होंने पुरानी संस्कृति को आज भी जीवित रखा है. वागड़ अंचल के इस जिले में में ‘आदिवासियों का कुंभ’ कहा जाने वाला मेला बेणेश्वर धाम में भरता है. जिसे देश ही विदेश से भी लोगों यहां इसे देखने आते है.
अरावली पर्वत श्रेणियों के बीच बसा है डूंगरपुर शहर. पहाड़ी ढलानों पर हरियाली और घास के मैदान दूर से ही लुभा लेते हैं. यहां की टेकरियों यानी छोटी पहाड़ियों पर बसी भीलों की बस्तियां इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती हैं. टेढ़े-मेढ़े रास्ते, पगडंडियां, बरसाती झरने, नदी-नाले और सागवान, महुआ, आम व खजूर के पेड़ इसका गहना हैं. इन सबके साथ इसकी सुंदरता में चार चांद लगाने का काम करती हैं यहां की सोम और माही नदियां. इन्हें वागड़ अंचल के जीवन का आधार कहा जाता है. यहां आपको देव सोमनाथ मंदिर, जूना महल, उदय विलास पैलेस और खूबसूरत डूंगरपुर शहर के साथ अनेकों की चीज़े देखने मिलेगी.
डूंगरिया भील के नाम पर बसा डूंगरपुर
डूंगरपुर की स्थापना के बारे में एक किंवदंती प्रचलित है. इसके अनुसार, इस क्षेत्र में डूंगरिया नामक एक शक्तिशाली भील सरदार रहता था. उसकी दो पत्नियां थीं, लेकिन वह एक संपन्न व्यापारी की पुत्री से भी विवाह करना चाहता था. व्यापारी को यह बात स्वीकार नहीं थी. उसने वागड़ प्रदेश के तत्कालीन रावल वीरसिंह देव से मदद की गुहार की. इसके बाद एक युद्ध में डूंगरिया मारा गया. उसकी विधवाओं को वीरसिंह ने वचन दिया कि वह उनके पति के नाम का स्मारक बनाकर उसे अमर कर देंगे. उन्होंने एक पहाड़ी पर डूंगरिया भील की स्मृति में मंदिर बनवाया और उसी के नाम पर डूंगरपुर नगर की स्थापना सन् 1282 में की गई थी. शिलालेखों में इसे डूंगरगिरि भी लिखा जाता था. सन् 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे अपने अधिकार में ले लिया. बाद में यह जगह डूंगरपुर प्रिंसली स्टेट की राजधानी भी रहा.








