खुशखबरी! भोपाल से शुरू होने वाली हैं कई नई मेमू ट्रेनें, आसपास के यात्रियों की परेशानी होगी कम

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आदित्य तिवारी/भोपाल. रेलवे नेआसपास के जिलों को जोड़ने के लिए मेमू ट्रेन चलाने की तैयारी शुरू कर दी है. रेलवे बोर्ड को भोपाल रेल मंडल के द्वारा मेमो ट्रेन की संख्या में बढ़ोतरी करने के लिए सुझाव दिया गया था. बता दें कि भोपाल रेलवे को ट्रैफिक फैसिलिटी सुधारने के लिए 114.71 करोड़ रुपये देने के प्रस्ताव को मान लिया गया है. भोपाल और रानी कमलापति स्टेशन से मेमू ट्रेन सीहोर, विदिशा, इटारसी, नर्मदापुरम के लिए चलाई जाएगी. मेमू ट्रेनों के चलने से हजारों यात्रियों को अप डाउन में लाभ मिलेगा साथ ही उनके समय की भी बचत होगी.

भोपाल से बीना के बीच अभी एक ही मेमू चल रही है. बीना स्टेशन पर ही इस ट्रेन के मेंटेनेंस का कार्य किया जाता है. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से कई सारी मेमू ट्रेन की शुरुआत होने वाली है जिससे इनकी संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.इसके बाद उनके मेंटेनेंस का काम निशातपुरा कोच फैक्ट्री में करवाया जाएगा.

डीआरएम सौरव बंदोपाध्याय के मुताबिक यात्रियों को सुविधाएं देने के फंड में रेलवे बजट में बढ़ोतरी की गई है. साथ ही यात्रियों के द्वारा अधिक ट्रेन चलाने की मांग को भी मंजूरी दे दी गई है. अब इंतजार बस बोर्ड की अनुमति का है.

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भोपाल जंक्शन कालोड कम किया जाएगा
इन सारे प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद भोपाल जंक्शन का भार कम होने के साथ साथ अन्य नई ट्रेनों की शुरुआत भी की जा सकती है. मेमू ट्रेन चलने के बाद मालवा एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनों के आवागमन में सुबह शाम के वक्त ट्रैफिक में कमी देखने को मिलेगी. रोजाना भोपाल जंक्शन से 230 ट्रेन का आवागमन होता है. बता दें कि भोपाल जंक्शन से 35 से 45 हजार यात्री का रोजाना गुजरना होता है.

20 मीटर जमीन के अंदर चलेगी मेट्रो ट्रेन
एम्स से करोंद तक भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट के पहले चरण में 16.8 किलोमीटर का लंबा ऑरेंज पथ बनाया जा रहा है. इस ऑरेंज पथ के 14 किलोमीटर का ट्रैक एलिवेटेड होगा वही बचे हुए 2 किलोमीटर जो की आरा मशीन के पास से सिंधी कॉलोनी तक का रास्ता है वह भूमि के नीचे होगा. इस टनल को जमीन से 20 मीटर नीचे बनाया गया. बता दें कि भोपाल रेलवे स्टेशन और नागदा बस स्टैंड के पास भूमिगत मार्ग में दो मेट्रो स्टेशन बनाने की तैयारी है.

टनल के लिए बोरिंग मशीन का इस्तेमाल
जमीन के अंदर मेट्रो के ट्रैक बिछाने के लिए बोरिंग मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है. मुंबई, पुणे, लखनऊ, दिल्ली एवं कोलकाता की टनल्स भी इसी तकनीक से बनवाई गई थीं. साथ ही 900 मीटर कर्व- टनल का भूमिगत मार्ग में निर्माण किया जा रहा है.

Tags: Indian railway

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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