
गुलशन सिंह/बक्सर. नगर के बाईपास रोड स्थित बुढ़िया काली मंदिर का वार्षिक पंचित पूजा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. भीषण गर्मी के बावजूद इस विशेष पूजा को लेकर नगर के लोगों में काफी उत्साह रहा. वहीं इस मौके पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली. मंदिर के पुजारी चंद्रशेखर उपाध्याय ने बताया कि वार्षिकोत्सव को लेकर अहले सुबह तीन बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया, जो देर रात तक चलता रहा. वहीं इस अवसर पर मंदिर परिसर को भव्य तरीके से सगंधित फूलों से सजाया गया था. पंचित पूजा पर मंदिर के बाहर मेला भी लगा था. जिसमें बच्चों के खिलौने से लेकर खाने-पीने तक की सामाग्री बिक रही थी.
पंडित चंद्रशेखर उपाध्याय ने बताया कि श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंचकर माता रानी के दरबार में जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की. उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे शाम होती गई श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई. उन्होंने बताया कि मां के उपर भक्तों की अपार श्रद्धा के कारण हजारों की भीड़ दर्शन करने पहुंचे थे. वहीं मंदिर कमिटी की ओर से सुबह, दोपहर व शाम को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां की भव्य पूजा की गई. इसके साथ हीं श्रद्धालु कतारबद्ध होकर मां के दरबार में माथा टेक कर अपने जीवन के खुशहाली की मन्नत मांगी. मां काली के दरबार में शहर सहित आस-पास के लोग महिला-पुरूषों की अपार भीड़ उमड़ी और श्रद्धालु मां का दर्शन करते रहे. उन्होंने बताया कि मंदिर में माता रानी के दर्शन करने से भक्तों की हर मुरादे पूरी होती है.
वार्षिकोत्सव में पुलिस व वोलेंटियर्स रहे मुस्तैद
पंडित चंद्रशेखर उपाध्याय ने बताया कि पंचित पूजा के अवसर पर देर शाम मंदिर में महाआरती का आयोजन किया गया. जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. मंदिर के पुजारी ने बताया कि मनोकामना पूर्ण करने वाली मां काली का मंदिर बक्सर नागरवाली के रूप में प्रसिद्ध है. मां काली मंदिर की स्थापना छोटी मंदिर के रूप में हुई थी. लेकिन धीरे-धीरे जब मंदिर से लोगों की आस्था बढ़ी तो मंदिर का निर्माण भी भव्य हुआ. वहीं वार्षिकोत्सव पर उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने को लेकर मंदिर कमिटी की ओर से 100 वोलेंटियर्स नियुक्त किये गए थे, जो मेला से लेकर मंदिर परिसर तक तैनात रहे. इसके अलावा दिन भर पुलिस प्रशासन भी सड़क पर जाम को छुड़ाने में कड़ी मशक्कत करते रहे.
मंदिर से जुड़ी हुई है कई मान्यताएं
पंडित चंद्रशेखर उपाध्याय ने बताया कि मंदिर का इतिहास पुराना है. उन्होंने बताया कि जब इस नगर का विकास नहीं हुआ था, तब नीम के पेड़ के नीचे पिंड के रूप में देवी की पूजा की जाती थी. इसलिए इनको बुढ़िया काली मां भी कहा जाता है. उन्होंने बताया कि पूर्वजों का कहना है कि मंदिर का कोई प्रमाण नहीं है कि कब यहां पर बना था. वहीं मान्यता है कि नगर पर जब भयंकर बीमारी का प्रकोप आया था, तब लोगों ने बुढ़िया काली मां से गुहार लगाई थी. जिसके बाद महामारी से नगर को छुटकारा मिला था. बुढ़िया काली मां के साथ-साथ नगर माता के रूप में भी यह मंदिर विख्यात है.
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FIRST PUBLISHED : June 03, 2023, 09:41 IST








