शनिवार को करें 4 मंत्रों का जाप, शनि देव हो उठेंगे प्रसन्न, जान लें सही और सरल विधि

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1. ॐ शं शनैश्चराय नमः॥अर्थात :सभी कर्मों का फल देने वाले, हे शनि देव, आप हमारे कु कर्मों का नाश कर हमें शुभ फल प्रदान करने की कृपा करें. हम आपको प्रणाम करते हैं.

2. ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥अर्थात :इस मंत्र का जाम ग्रह शांति के लिए किया जाता है. जिसका अर्थ है जिन देवता की काया नीले रंग की है, जो सूर्य देव और छाया की संतान हैं जिन्हें यम के बड़े भाई के रूप में जाना जाता है. मैं ऐसे शनि देव को कोट-कोटी प्रणाम करता हूं. 3. ॐ काकध्वजाय विद्महे,खड्गहस्ताय धीमहि, तन्नो मन्दः प्रचोदयात्॥अर्थात :इस मंत्र को शनिदेव के गायत्री मंत्र कहा जाता है. जिसका अर्थ है जिनका वाहन कौआ है, जो अपने हाथों में खड्ग लिए हुए हैं, जिनके पास तीव्र और विशेष बुद्धि है, ऐसे शनि महाराज का मैं ध्यान करता हूं. हे धीमी चाल वाले शनि देव आप हमें अपनी शरण में स्थान दें. 4. वैदूर्य कांति रमल:, प्रजानां वाणातसी कुसुम वर्ण विभश्च शरत:।अन्यापि वर्ण भुव गच्छति तत्सवर्णाभि सूर्यात्मज: अव्यतीति मुनि प्रवाद:।।अर्थात :ऋषि महात्मा कहते हैं कि जब शनि ग्रह वैदुर्यरत्न या बनफूल या अलसी के फूल के समान पवित्र वर्ण से प्रकाशमान होता है, तो यह कई विषयों को शुभ फल प्रदान करता है. जिससे अन्य पात्र भी उज्जवल हो जाते हैं, उसके बाद ये उच्च वर्णों को समाप्त करता है. इस विधि से करें जापशनि देव के हर एक मंत्र की महिमा है. इसलिए इन मंत्रों के जाप के लिए बहुत सावधानी बरतनी होती है. इन मंत्रों को सही विधि के अनुसार ही करना उचित माना गया है. ऐसा करने से आपको मंत्र जाप का फल अवश्य प्राप्त होगा. शनिवार के दिन नित्य कर्मों से निवृत्त होकर साफ आसन बिछा कर, पूर्व या पश्चिम दिशा की तरफ मुख करके बैठ जाएं. अब रुद्राक्ष या लाल चंदन के मोतियों की माला से जाप करें. ध्यान रहे मंत्र जाप के समय शनि देव का चित्र ना रखें. मन ही मन उनका ध्यान करें. इस दौरान आपको नीले रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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