Hindi Kavita: चिंगारी तूने दे थी यह दिल सदा जलता रहा- अमृता प्रीतम

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अमृता प्रीतम की रचनाओं का अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ है. उनकी कहानी, कविता और उपन्यास की 100 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं. साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए अमृता प्रीतम को ‘पद्मविभूषण’ और ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से अलंकृत किया गया. उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से जीवन के तमाम उतार-चढ़ावों को शब्द दिए हैं. प्रस्तुत है उनकी एक मशहूर कविता- सिगरेट–

यह आग की बात है
तूने यह बात सुनाई है
यह ज़िंदगी की वो ही सिगरेट है
जो तूने कभी सुलगाई थी

चिंगारी तूने दे थी
यह दिल सदा जलता रहा
वक़्त कलम पकड़ कर
कोई हिसाब लिखता रहा

चौदह मिनिट हुए हैं
इसका ख़ाता देखो
चौदह साल ही हैं
इस कलम से पूछो

मेरे इस जिस्म में
तेरा सांस चलता रहा
धरती गवाही देगी
धुआं निकलता रहा

उमर की सिगरेट जल गई
मेरे इश्के की महक
कुछ तेरी सांसों में
कुछ हवा में मिल गई,

देखो यह आखिरी टुकड़ा है
उंगलियों में से छोड़ दो
कहीं मेरे इश्क की आंच
तुम्हारी उंगली ना छू ले

ज़िंदगी का अब गम नहीं
इस आग को संभाल ले
तेरे हाथ की खैर मांगती हूं
अब और सिगरेट जला ले!

अमृता प्रीतम का रचना संसार जितना चर्चित रहा है, उनका निजी जीवन और व्यक्तित्व उतना ही रहस्य से भरा हुआ था. पाठक जैसे-जैसे उनकी रचनाओं के माध्यम से अमृता प्रीतम के करीब जाने की कोशिश करता है, रहस्य उतना ही गहराता जाता है. 31 अगस्त, 1919 को गुजरांवाला, पंजाब में जन्मीं अमृता प्रीतम ने हर विषय पर कलम चलाई है. भारत-पाकिस्तान के बंटवारे पर उनका उपन्यास ‘पिंजर’ बहुत ही चर्चित रहा है. इस उपन्यास पर इसी नाम से एक फ़िल्म भी बनी है.

Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Hindi Writer, Literature

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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