
हाइलाइट्स
आज के दिन शिव और विष्णु पूजा का सुंदर संयोग भी बना है.
गुरु प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त: शाम 07 बजकर 14 मिनट से रात 09 बजकर 16 मिनट तक.
आज 1 जून गुरुवार को गुरु प्रदोष व्रत है. आज वरीयान योग, चित्रा और स्वाती नक्षत्र है, उसके अलावा शिव और विष्णु पूजा का सुंदर संयोग भी बना है. प्रदोष व्रत भगवान शिव की पूजा के लिए है और गुरुवार भगवान विष्णु की आराधना का दिन है. गुरु प्रदोष व्रत की पूजा शाम को प्रदोष काल में होती है, इस वजह से यह व्रत अन्य व्रतों से अलग है. गुरु प्रदोष व्रत और शिव जी के आशीर्वाद से व्यक्ति को अपने दुश्मनों पर विजय प्राप्त होती है. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं गुरु प्रदोष व्रत की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में.
गुरु प्रदोष व्रत 2023 मुहूर्त
ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ: आज, गुरुवार, दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से
ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी तिथि का समापन: कल, शुक्रवार, दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर
गुरु प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त: शाम 07 बजकर 14 मिनट से रात 09 बजकर 16 मिनट तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: शाम 07 बजकर 14 मिनट से रात 08 बजकर 30 मिनट तक
चर-सामान्य मुहूर्त: रात 08 बजकर 30 मिनट से रात 09 बजकर 47 मिनट तक
वरीयान योग और चित्रा नक्षत्र में प्रदोष व्रत
वरीयान योग: आज सुबह से लेकर शाम 7 बजे तक, उसके बाद परिघ योग प्रारंभ
चित्रा नक्षत्र: आज सुबह 06 बजकर 48 मिनट तक, उसके बाद से स्वाती नक्षत्र
आज का अभिजित मुहूर्त: दिन में 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक
गुरु प्रदोष व्रत की पूजा विधि
1. आपको गुरु प्रदोष व्रत रखना है तो सुबह में स्नान के बाद साफ कपड़े पहन लें. उसके बाद गुरु प्रदोष व्रत और शिव जी की पूजा का संकल्प करें. दैनिक पूजा पाठ कर लें.
2. दिनभर भगवान शिव की भक्ति में समय व्यतीत करें. फलाहार पर रहें, अन्न ग्रहण न करें. उसके बाद शाम के समय शुभ मुहूर्त में शिव मंदिर जाएं या घर पर ही गुरु प्रदोष व्रत की पूजा करें.
3. सबसे पहले शिवलिंग का गंगाजल और गाय के दूध से अभिषेक करें. फिर भोलेनाथ को फूल, फल, अक्षत्, बेलपत्र, शमी के पत्ते, भांग, धतूरा, चंदन, माला, यज्ञोपवीत, धूप, दीप आदि अर्पित करके पूजन करें. इस दौरान ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें.
4. अब आप शिव चालीसा का पाठ करें. गुरु प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें. फिर घी के दीप या कपूर से शिव जी की आरती करें. उसके बाद शिवजी से मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें.
5. रात्रि के समय में जागरण करें. अगले दिन सुबह यानि कल 2 जून को सूर्योदय के बाद स्नान करके पूजा करें. अपनी क्षमता के अनुसार दान दें. फिर पारण करके व्रत को पूरा करें.
प्रदोष व्रत के फायदे
प्रदोष व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि को होता है. एक माह में दो प्रदोष व्रत होते हैं. दिन के अनुसार प्रदोष व्रत का महत्व भी अलग होता है. अब गुरु प्रदोष व्रत रखने से शत्रुओं पर विजय मिलती है, सोम प्रदोष व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. शनि प्रदोष व्रत पुत्र प्राप्ति के लिए रखा जाता है.
.
Tags: Dharma Aastha, Lord Shiva
FIRST PUBLISHED : June 01, 2023, 06:34 IST









