
कुंदन कुमार/ गया.कभी फ्लोराइड युक्त पानी के लिए चर्चित गांव में सब बदल गया. यहां लोग टेढ़े मेढ़े यानि दिव्यांग हो रहे थे. लेकिन एक योजना ने सब कुछ बदल दिया.जिला के आमस प्रखंड क्षेत्र में भुपनगर गांव पहाड़ों के बीच में बसा है. इसकी भौगोलिक बनावट ऐसी है कि यहां तक पहुंचने के लिए दो पहाड़ों को पार करना पड़ता है. 2009 से पूर्व यह गांव पानी में फ्लोराइड को लेकर पूरे राज्य में चर्चित था, क्योंकि इस गांव के चापाकल से निकलने वाला पानी जहरीला होता था. फ्लोराइड ज्यादा रहने के कारण इस गांव के अधिकांश लोग दिव्यांगता के शिकार हो गये थे. गांव 1988 में तब चर्चित हुआ, जब गांव के अधिकांश लोग दिव्यांग हो गए. कई लोगों की फ्लोराइड युक्त पानी पीने से मौत हो गई.
पानी में फ्लोराइड होने से बच्चे हो रहें थे टेढ़े मेढ़े
1990 में इस गांव के पानी की जांच की गई तो पाया गया कि काफी मात्रा में गांव के चापाकल से निकलने वाले पानी में फ्लोराइड है. इसी कारण गांव के लोग टेढ़े मेढ़े यानि दिव्यांग हो रहे थे. ग्रामीणों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई. जिस कारण कई लोग दिव्यांगता के शिकार होते गए. देखते-देखते हालात यह हो गई कि गांव के अधिकांश लोग टेढे मेढे होने लगे. जिसके बाद भारत सरकार की ओर से इस गांव में वर्ष 2009 में करीब 45 लाख रुपए की लागत से ग्रामीणों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए एक वाटर फिल्टर प्लांट लगाया गया. जो अब ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है. गांव की आबादी तकरीबन 400 से अधिक है. अब गांव में जो भी नया बच्चा जन्म लेता है, वह पूरी तरह स्वस्थ जन्म ले रहा है.
इसी गांव के रहने वाले पूर्व मुखिया बुलाकी मांझी एवं ग्रामीण संजय मांझी का कहना है कि जब से गांव में सरकार द्वारा हम लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए वाटर फिल्टर प्लांट लगाया गया है. तब से अब इस गांव का कोई भी बच्चा या व्यक्ति दिव्यांगता का शिकार नहीं हो रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक वाटर फिल्टर प्लांट लगने के बाद अब गांव की तस्वीर बदल गई है.
आजादी के 75 साल बाद भी नहीं बनी यहां सड़क
पानी की समस्या तो इस गांव से दूर हो गई और लेकिन इस गांव के ग्रामीण अब भी एक सड़क को लेकर सरकार से उम्मीद लगाए हुए बैठे है कि एक अदद सड़क बन जाए, ताकि लोगों के आवागमन मे परेशानी न हो. आजादी के 75 साल बीत गये है लेकिन इस गांव मे पहुंचने के लिए कोई सड़क नहीं है. गांव में जाने के लिए दो पहाड चढ़ना पड़ता है. पथरीली रास्ते से लोग आवागमन करते है लेकिन इस समस्या से भी इस गांव के लोगों को जल्द निजात मिलते वाली है.
डीएम डाॅ. त्यागराजन एसएम ने जानकारी देते हुए बताया कि वन विभाग का जमीन होने के कारण यहां सड़क नहीं बन पा रही थी, लेकिन कुछ दिन पहले ही वन विभाग से एनओसी मिल चुका है. टेंडर प्रकिया जारी है और कुछ दिनों में वहां सड़क बनकर तैयार हो जाएगी.
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FIRST PUBLISHED : May 31, 2023, 21:51 IST








