इतिहास बन गई बग्गी, IMA पासिंग आउट परेड में अब कार से आएंगे मुख्य अतिथि, जानें वजह

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देहरादून. 10 जून को होने वाली भारतीय सैन्य अकादमी की पासिंग आउट परेड में अब मुख्य अतिथि को घोड़े बग्गी से नहीं लाया जाएगा. ब्रिटिश काल से चली आ रही इस परंपरा को रक्षा मंत्रालय के निर्देश के बाद हटाने का फैसला ले लिया गया है. पहली बार आधिकारिक तौर पर यह व्यवस्था अपनाई जाएगी. अब बग्गियों की जगह सरकारी गाड़ी में सवार होकर परेड में अतिथि पहुंचेंगे. दरअसल पटियाला कोर्ट के समय से अलग-अलग बग्गी से मेहमानों की अगवानी होती आई है, लेकिन 10 जून से इसमें बदलाव होगा.

भारतीय सेना में आज भी कई रीति-रिवाज अंग्रेजी शासनकाल और उससे पहले के हैं. ब्रिटिश काल की विरासत को छोड़ने के फैसले के साथ ही उस समय से चली आ रही सेना की यूनिफार्म, साज-ओ-सामान, नियम-कानून, अधिनियम और नीतियों में भी परिवर्तन होगा. सैन्य संस्थानों में धीरे-धीरे इसकी शुरुआत भी हो गयी है. आईएमए देहरादून की पीआरओ लेफ्टिनेंट कर्नल ईशानी मैत्रा ने बताया कि IMA के पास निर्देश आ चुके है कि घोड़े बग्गी से मुख्य अतिथि को न लाया जाए, जिसको इस बार से अमल करेंगे.

साल 1963 से आईएमए पास आउट हुए रिटायर्ड ब्रिगेडियर के केजी बहल इस फैसले को सही नहीं मानते. उनका कहना है कि अच्छी चीज के लिए बदलाव हो तो वह ठीक है लेकिन परंपराओं के साथ छेड़छाड़ सही नहीं है. चैटवुड बिल्डिंग का भी ऐतिहासिक महत्व है तो क्या उसका नाम भी बदल दिया जाएगा. मिलिट्री साइंस को समझने वाले भी मानते हैं कि इतिहास से कई बातें सीखने समझने को मिलती हैं. उनके साथ छेड़छाड़ ठीक नहीं. देश भर के संस्थानों में अंग्रेजी पंरपराओं को छोड़ने की मुहिम चल रही है, और सैन्य संस्थाओ में भी ये अमल में लाई जा रही हैय अब फैसला सरकार का है तो इस पर बहस छिड़ना लाजमी है.

Tags: Dehradun news, IMA

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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