
नरेश पारीक/चूरू.जीवन में कठिन संघर्ष से ही सफलता का शंखनाद किया जा सकता है. यदि हम कार्य में होने वाले संघर्ष को देखकर अपने हाथ पीछे कर लें तो हम लक्ष्य तक कभी नहीं पहुंच सकते. कठिन परिस्थितियों में विवेकपूर्ण निर्णयों के साथ ही सफलता संभव है. संघर्ष का दौर जब समाप्त होता है, उसके बाद से ही सफलता का युग आरंभ होता है. न्यूज़ 18 डिजिटल आज आपको एक ऐसी ही सच्ची और संघर्षो से भरी कहानी से रूबरू करवा रहा है जो सुनने में भले ही फिल्मी लगे लेकिन सत्य है. दरअसल मां-बाप के संघर्षों को देख बेटो ने जुनून और शिद्दत के साथ इतनी मेहनत की आज इनकी सफलता के चर्चे गली-गली में है.
राजकीय विधि महाविद्यालय के प्राचार्य श्रवण कुमार सैनी जिनके माता-पिता ने भले ही कभी स्कूल ना देखी हो लेकिन अपने चार बेटो को इतना पढ़ाया और लिखाया की एक बेटा IAS और तीन बड़े पदों पर आसीन है. राजकीय विधि महाविद्यालय के प्राचार्य श्रवण कुमार सैनी बताते हैं उनके पिता एक लघु किसान थे और माता-पिता दोनो ही कभी स्कूल नहीं गए, लेकिन हम सभी भाइयों को पढ़ने के लिए इतना प्रेरित किया कि आज सभी एक सफल मुकाम पर है.
खेत से आकर स्कूल जाते
प्राचार्य श्रवण कुमार सैनी ने बताया कि 7 भाई बहन थें. जिनमें चार भाई और तीन बहन पूरा परिवार पिताजी जो खेती करते थे उस पर निर्भर था. ऐसे में पिताजी का हाथ बंटाने चारों भाई खेत जाते और खेत मे गाय, भैंस चराकर फिर घर आते और स्कूल जाते थें. उन्होंने बताया कि पिताजी का संघर्ष देखकर और आर्थिक स्थिति देखकर मन में पीड़ा होती और उसी के पर इतनी मेहनत की आज चारो भाई एक सफल मुकाम पर हैं.
गवर्मेंट स्कूल, कॉलेज से की पढ़ाई
सैनी बताते हैं कि चारो भाइयों ने प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय गवर्मेंट स्कूल में हासिल की और ग्रेजुएशन भी चूरू के लोहिया कॉलेज से किया. उसका परिणाम यह रहा कि सबसे बड़े भाई डॉक्टर नवरंग लाल सैनी IAS और उनसे छोटे छगनलाल सैनी RTDC में मैनेजर और तीन नंबर भाई जो आज इस दुनिया मे नहीं गोविंद सैनी भी RTDC में चेयरमैन रहे और सबसे छोटे श्रवण कुमार सैनी राजकीय विधि महाविद्यालय के प्राचार्य है.
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FIRST PUBLISHED : May 26, 2023, 17:38 IST








